



भिलाई।
बुधवार दोपहर भिलाई स्टील प्लांट में एक बड़ा हादसा हुआ, जब ब्लास्ट फर्नेस-6 के स्टोव नंबर 18 में गैस का रिसाव होने से तीन ठेका मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना लगभग दोपहर 1:30 बजे हुई, जब स्टील प्लांट में कार्यरत तीन मजदूर मोहम्मद मेराज (36 वर्ष), हरिचरण (47 वर्ष), और मोहन लाल गुप्ता (55 वर्ष) जहरीली गैस की चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि यह गैस कार्बन मोनो ऑक्साइड थी, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक होती है।
हादसे के तुरंत बाद, प्लांट के मेडिकल स्टाफ ने मौके पर पहुंचकर इन तीनों को मेन मेडिकल पोस्ट पहुंचाया। जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें तुरंत सेक्टर-9 हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया है और उनका उपचार जारी है। फिलहाल तीनों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, और उनकी निगरानी में विशेष चिकित्सा दल नियुक्त किया गया है।
प्रबंधन ने की त्वरित प्रतिक्रिया, हादसे का कारण अज्ञात
घटना की सूचना मिलने के बाद भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, अब तक गैस के रिसाव का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। बीएसपी प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि हादसे के कारणों की गहराई से जांच की जाएगी और सुरक्षा मानकों को और सख्त किया जाएगा।
पुलिस जांच में जुटी, प्लांट में सुरक्षा मानकों पर सवाल
घटना के बाद भट्ठी पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे के पीछे के संभावित कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक सबूत इकट्ठा किए हैं। फिलहाल प्राथमिक जांच में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ब्लास्ट फर्नेस-6 के स्टोव नंबर 18 में गैस रिसाव संभवतः तकनीकी खामी के कारण हुआ होगा। इस दुर्घटना के बाद से प्लांट में सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं और श्रमिकों की सुरक्षा पर गहन चर्चा हो रही है।
ठेका मजदूर हुए हादसे के शिकार, गैस के संपर्क में आने से बिगड़ी हालत
रिसाव की चपेट में आए मजदूरों में से तीनों ठेका श्रमिक हैं। इनमें मोहम्मद मेराज, हरिचरण और मोहन लाल गुप्ता शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, तीनों मजदूर लंच के बाद कुछ समय के लिए स्टोव के पास बैठे थे, तभी अचानक गैस का रिसाव होने लगा। जहरीली गैस का संपर्क मिलते ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और वे बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा के लिए ले जाया गया और उनकी गंभीर हालत को देखते हुए सेक्टर-9 हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है।
कार्बन मोनो ऑक्साइड का रिसाव अत्यंत खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटना में रिसाव हुई गैस कार्बन मोनो ऑक्साइड थी, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक मानी जाती है। विशेषज्ञों ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में इसका पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) स्तर 50 प्वाइंट से कम होना चाहिए, जबकि घटना के समय यहां का पीपीएम 150 प्वाइंट से अधिक पाया गया। इतनी उच्च मात्रा में कार्बन मोनो ऑक्साइड का निकलना जानलेवा हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति 5 मिनट से अधिक समय तक इस गैस के संपर्क में आ जाए, तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गैस प्लांट के अन्य हिस्सों में भी फैलती, तो और भी बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
बीएसपी प्रबंधन ने दिए जांच के आदेश
घटना के बाद बीएसपी प्रबंधन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए एक जांच समिति का गठन किया है। इस समिति को निर्देश दिया गया है कि वह पूरी घटना की विस्तृत जांच करे और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। बीएसपी प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी निष्कर्ष सामने आएंगे, उसके अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्लांट के सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जाएगा।
प्लांट में सुरक्षा मानकों पर सवाल
भिलाई स्टील प्लांट में इस हादसे के बाद से सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है जब यहां इस तरह का हादसा हुआ हो। प्लांट में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के संबंध में भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। प्लांट में जहरीली गैसों के रिसाव से निपटने के लिए पहले से ही कई सुरक्षा प्रोटोकॉल होने चाहिए थे। इस घटना के बाद से मजदूर संघों ने भी प्रबंधन से सुरक्षा मानकों में सुधार की मांग की है।






