



रायपुर।
भारत के सबसे बड़े एल्यूमिनियम उत्पादक वेदांता एल्यूमिनियम ने औद्योगिक उत्पादन को अधिक सस्टेनेबल बनाने के लिए गेल (इंडिया) लिमिटेड की सहायक कंपनी गेल गैस लिमिटेड से गैस बिक्री करार (जीएसए) किया है। इस करार के तहत वेदांता के झारसुगुड़ा स्मेल्टर को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी, जिससे सालाना 47,292 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (टीसीओ2ई) कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
इस करार के अनुसार, झारसुगुड़ा में स्थित वेदांता का 430 किलो टन प्रति वर्ष (केटीपीए) क्षमता वाला कास्ट हाउस लाभान्वित होगा। इस कास्ट हाउस में पिघली धातु से 250 केटीपीए बिलेट्स और 180 केटीपीए अन्य मूल्यवर्धित एल्यूमिनियम उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए गेल गैस लिमिटेड 7.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाएगी, जिसके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 32,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एससीएम) प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होगी।
वेदांता एल्यूमिनियम की गैर-कार्यकारी निदेशक और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की अध्यक्ष प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने कहा, “सस्टेनेबिलिटी का वेदांता के सभी कामकाज में बुनियादी महत्व रहा है। गेल गैस लिमिटेड के साथ यह करार स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
वेदांता एल्यूमिनियम के मुख्य परिचालन अधिकारी सुनील गुप्ता ने इस करार पर हस्ताक्षर करते हुए कहा, “हम पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिए हमेशा प्रयासरत रहे हैं। यह करार कार्बन उत्सर्जन में कमी और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में हमारी मदद करेगा।”
नए कास्ट हाउस में प्राथमिक ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस का उपयोग होगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में प्रति माह 62 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। इससे सालाना लगभग 47,292 टीसीओ2ई उत्सर्जन में कमी आएगी। वेदांता एल्यूमिनियम के ऐसे प्रयासों के परिणामस्वरूप उसके उत्पाद एनवायरनमेंट प्रोडक्ट डिक्लरेशन (ईपीडी) के उच्च स्तरीय सस्टेनेबिलिटी मानकों पर खरे उतरते हैं।
वेदांता एल्यूमिनियम, जो वित्त वर्ष 2024 में भारत के आधे से अधिक एल्यूमिनियम का उत्पादन कर रहा है, मूल्यवर्धित एल्यूमिनियम उत्पादों में अग्रणी है। वेदांता एल्यूमिनियम का मिशन स्वच्छ भविष्य निर्माण के लक्ष्य से ‘भविष्य की धातु’ के रूप में एल्यूमिनियम के उपयोग को बढ़ावा देना है।





