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कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने की स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर जोर

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सुकमा (कौशल संदुजा)।

कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में सीएमएचओ डॉ. कपिल कश्यप सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित बैठक के निर्देश

कलेक्टर ध्रुव ने स्वास्थ्य सेवाओं में समन्वय व सुधार के लिए हर महीने की 10 और 15 तारीख को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों के साथ स्वास्थ्य केंद्रों में बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।

मरीजों से सहज व विनम्र व्यवहार सुनिश्चित करें

कलेक्टर ने स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों को मरीजों के साथ सहज, विनम्र और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करने के निर्देश दिए, ताकि मरीजों को सकारात्मक अनुभव हो।

रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश

कलेक्टर ध्रुव ने सीएमएचओ को निर्देशित किया कि मानव संसाधन की कमी को प्राथमिकता से दूर करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि ग्रामीणों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच

कलेक्टर ने अंदरूनी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए रोस्टर तैयार कर नियमित रूप से ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, ग्रामीणों को बेहतर इलाज के लिए आवश्यक सुझाव देने को कहा।

स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने पर जोर

कलेक्टर ध्रुव ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्वास्थ्य केंद्र के सभी कर्मचारियों को समय-समय पर आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के निर्देश

जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को जागरूक और प्रेरित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि डिलीवरी के समय स्किल बर्थ अटेंडेंट की सहायता से सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जाए, ताकि मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके।

मलेरिया रोकथाम के लिए निर्देश

कलेक्टर ध्रुव ने मलेरिया नियंत्रण के लिए आश्रम-छात्रावासों में विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि छात्रावासों में आवश्यक दवाइयों का वितरण और छिड़काव नियमित रूप से किया जाए। साथ ही, मलेरिया से बचाव के अन्य उपायों को प्राथमिकता के साथ लागू किया जाए, ताकि छात्रों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में मलेरिया नियंत्रण के लिए प्रभावी पहल पर जोर देते हुए मैदानी अमले के माध्यम से सतत निगरानी, जांच और उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, स्वास्थ्य शिक्षा के जरिए व्यापक जनजागरूकता निर्मित करने की बात कही।

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