सुकमा (कौशल संदुजा)।
सुकमा जिले के ताड़मेटला, जहां देश की सबसे बड़ी नक्सली वारदात में 76 जवान बलिदानी हुए थे, के समीप स्थित चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। भारत सरकार ने इस स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाण पत्र से सम्मानित किया है। इस उपलब्धि के तहत इसे 89.69 प्रतिशत का उत्कृष्ट स्कोर मिला है, जो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
15-16 नवंबर 2024 को भारत सरकार की टीम ने इस स्वास्थ्य केंद्र का मूल्यांकन किया। ओपीडी, आईपीडी, लैब, लेबर रूम और प्रशासनिक कार्य जैसे सभी विभागों में इसने उच्च रैंक प्राप्त की। राज्य और जिला प्रशासन के सहयोग और डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट्स की भूमिका ने इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के मानकों पर खरा उतरने में मदद की।
नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद
चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जहां विकास और बुनियादी सुविधाएं लंबे समय तक बाधित रहीं। इस क्षेत्र में सड़क, नेटवर्क और बाजार जैसी सुविधाएं सीमित हैं। वर्षा के मौसम में यह इलाका टापू जैसा बन जाता है, जिससे यहां पहुंच पाना कठिन हो जाता है। वर्ष 2020 में यहां स्वास्थ्य भवन और आवासीय सुविधाओं का निर्माण हुआ, जिसने सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह केंद्र 45 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है, जिनमें अधिकांश नक्सल प्रभावित हैं। हर महीने औसतन 20 संस्थागत प्रसव, 1,000 से अधिक ओपीडी और 100 से अधिक भर्ती मरीजों को यहां उपचार मिलता है।
ताड़मेटला: देश की सबसे बड़ी नक्सली वारदात का केंद्र
ताड़मेटला गांव, जो चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आता है, देश की सबसे बड़ी नक्सली वारदात का गवाह है। 76 जवानों की शहादत ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय सुर्खियों में लाया। इसके अलावा, सुकमा कलेक्टर का अपहरण और बुरकापाल में हुआ बड़ा नक्सली हमला भी इसी इलाके की घटनाएं हैं।
आज, चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र इस क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रतीक बन चुका है।










