नई दिल्ली।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को नई दिल्ली विधानसभा के चुनाव को शून्य घोषित करने और इस सीट पर फिर से चुनाव कराने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता विश्वनाथ अग्रवाल, जिन्हें एनसीपी (अजीत पवार) ने उम्मीदवार घोषित किया था, ने आरोप लगाया कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं था और उनका नामांकन फॉर्म स्वीकार नहीं किया गया।
भा.ज.पा. उम्मीदवार परवेश साहिब सिंह वर्मा ने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हराया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनका नामांकन फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाने के कारण वह चुनाव में भाग नहीं ले सके और इसका नतीजा यह हुआ कि अन्य उम्मीदवारों के पक्ष में वोट चले गए।
याचिकाकर्ता ने अदालत से नई दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को शून्य घोषित करने और फिर से चुनाव कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उनका नामांकन फॉर्म स्वीकार न करना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के जनादेश से विचलन है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने भारत के चुनाव आयोग, राज्य चुनाव आयोग, रिटर्निंग ऑफिसर, परवेश साहिब सिंह वर्मा, अरविंद केजरीवाल, संदीप दीक्षित और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 27 मई को तय की गई है।
याचिकाकर्ता, जो एक वकील भी हैं, एडवोकेट किरण बाला अग्रवाल के साथ कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कहा कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि वह 17 जनवरी 2025 को नामांकन दाखिल करने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई।









