Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

महिला आयोग की जनसुनवाई: पति के इनकार पर डीएनए जांच का आदेश, संविदाकर्मी को मिलेगा बकाया वेतन

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

 

रायपुर (सत्यानंद सोई)

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में आज महिला उत्पीड़न से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्यगण श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, श्रीमती सरला कोसरिया व श्रीमती ओजस्वी मंडावी ने प्रार्थी महिलाओं की शिकायतों को सुना और आवश्यक निर्देश दिए। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 335वीं व रायपुर जिले में 157वीं जनसुनवाई आयोजित की गई।

 

पत्नी और पितृत्व से इनकार करने पर डीएनए टेस्ट

आज की सुनवाई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें अनावेदक (पति) ने आवेदिका को अपनी पत्नी मानने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उसने अपने बेटे के पितृत्व पर भी सवाल उठाया। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने आवेदिका, उसके बेटे व अनावेदक का डीएनए जांच कराने का आदेश दिया है। आयोग ने कलेक्टर कवर्धा व गरियाबंद को पत्र लिखकर डीएनए टेस्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) गरियाबंद, छत्तीसगढ़ के फॉरेंसिक लैब द्वारा कराने का निर्देश दिया है। आयोग ने यह भी निर्णय लिया है कि इस पूरी प्रक्रिया को पुलिस अधीक्षक गरियाबंद व पुलिस अधीक्षक कवर्धा संयुक्त रूप से कराएंगे और दो माह के भीतर डीएनए रिपोर्ट आयोग को भेजेंगे।

सरकारी योजना में बाधा डालने पर मिली चेतावनी

एक अन्य प्रकरण में आवेदिकागणों ने बताया कि उन्हें ग्राम पंचायत गढ़फुलझर द्वारा जमीन आवंटित की गई थी और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनका मकान बनाना भी स्वीकृत हो चुका है। लेकिन अनावेदक पिछले चार वर्षों से इस निर्माण में बाधा डाल रहा है, जिससे महत्वपूर्ण शासकीय योजना अटकी हुई है। आयोग द्वारा समझाइश दिए जाने पर अनावेदक ने भविष्य में आवेदिकागणों को परेशान न करने का आश्वासन दिया है। आयोग ने अनावेदक को चेतावनी दी है कि यदि वह आगे भी निर्माण कार्य में रुकावट डालता है, तो आवेदिकागण थाना-बसना में एफआईआर दर्ज करा सकेंगी। इसके बाद इस प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया।

किराएदारों को धमकाने से रोकने का आदेश

एक अन्य मामले में आवेदिका ने शिकायत की थी कि अनावेदक उसके हक में किसी प्रकार की दखलंदाजी कर रहा है और किरायेदारों को भी धमका रहा है। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अनावेदक को आवेदिका के मामले में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने और किरायेदारों को न धमकाने की सख्त हिदायत दी। इस सहमति के आधार पर प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।

संविदाकर्मी को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा

एक प्रकरण में आवेदिका ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उसने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था और 22 नवंबर 2024 को एक पुत्र को जन्म दिया था। नियमानुसार वह 180 दिन के मातृत्व अवकाश की हकदार थी, लेकिन उसे केवल 24 दिन का अवकाश ही स्वीकृत किया गया। अनावेदक ने सफाई दी कि संविदा नियुक्ति 11 माह की अवधि के लिए थी, जो 3 जनवरी 2025 को समाप्त हो गई थी और अगले ही दिन उसे पुनः संविदा पर रखा गया। अनावेदक का तर्क था कि सर्विस ब्रेक के कारण नए करार में उसी संतान के लिए दोबारा मातृत्व अवकाश नहीं दिया जा सकता है। आयोग ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आवेदिका को मातृत्व अवकाश का मेल 29 जनवरी 2025 को भेजा गया था, जिससे स्पष्ट है कि संविदा अवधि बढ़ाए जाने के बाद यह मेल भेजा गया। ऐसी स्थिति में आवेदिका 5 जनवरी 2025 से नई कार्यावधि के अनुसार 180 दिन के मातृत्व अवकाश की हकदार है। आयोग ने अनावेदकगणों को निर्देश दिया कि वे विभागीय त्रुटि को सुधारते हुए आवेदिका को पहले दिए गए 24 दिन के मातृत्व अवकाश की राशि समायोजित कर जनवरी 2025 के बाद 180 दिन का अवकाश दें या शेष 156 दिन का मातृत्व अवकाश स्वीकृत करें। आयोग ने अनावेदकगणों से एक माह के भीतर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है, जिसके बाद प्रकरण का अंतिम निराकरण किया जाएगा।

संविदाकर्मी को मिलेगा बकाया वेतन और अनुभव प्रमाण पत्र

एक अन्य मामले में आवेदिका, जो एक संविदा कर्मचारी है, ने शिकायत की थी कि अनावेदक पक्ष ने उसका तीन साल का सीआर रोक रखा है और उसका बकाया वेतन 45 हजार रुपये व अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दिया जा रहा है। अनावेदक पक्ष ने इसके कई कारण बताए थे। आज की सुनवाई के दौरान आवेदिका ने अपनी मांग दोहराई। आयोग के निर्देश पर अनावेदक ने आवेदिका को बकाया वेतन 45 हजार रुपये और अनुभव प्रमाण पत्र देने की सहमति जताई है। आयोग ने अनावेदक को निर्देश दिया है कि इस माह जुलाई में बनने वाले वेतन बिल के साथ ही आवेदिका के 45 हजार रुपये के भुगतान की प्रक्रिया पूरी करें और इसकी प्रति आयोग को भेजें। इसके बाद इस प्रकरण को समाप्त कर दिया जाएगा।

पति की मृत्यु के बाद बहू को मिला हक

एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है और उसके दो बच्चे हैं। गुढ़ियारी में उनके एक मकान में दो कमरे, एक हॉल व एक किचन है, जिसमें आवेदिका अपने दोनों बच्चों व सास-ससुर के साथ रहती थी। इस मकान के ऊपर चार कमरे किराए पर हैं, जिसका लगभग 12 से 15 हजार रुपये किराया आवेदिका की सास रखती है। इसके अलावा, आवेदिका के पति का एक मकान सोनडोंगरी में भी है, जिसका किराया लगभग 2 हजार रुपये आता है। आयोग ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अनावेदक (सास) को आदेश दिया कि वे मकान के किराए का 4 हजार रुपये प्रतिमाह व सोनडोंगरी के किराए का 2 हजार रुपये, कुल मिलाकर 6 हजार रुपये आवेदिका बहू को दें। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि आवेदिका के पति की मृत्यु के बाद मिले 4 लाख रुपये, जिसमें से अब 2 लाख रुपये शेष हैं, को अनावेदकगण आवेदिका के बच्चों के नाम से फिक्स डिपॉजिट कराएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई व अन्य खर्च सुनिश्चित हो सके। आयोग ने दोनों पक्षों को समझाइश दी कि गुढ़ियारी स्थित मकान में आवेदिका व उसके बच्चे एक कमरा व किचन में रहेंगे, जबकि अनावेदकगण एक हॉल व एक कमरे में रहेंगे। साथ ही, दोनों पक्ष भविष्य में किसी प्रकार का झगड़ा नहीं करेंगे और एक-दूसरे के काम में दखलअंदाजी नहीं करेंगे। इस संबंध में दोनों पक्षों के मध्य स्टाम्प पेपर पर लिखा-पढ़ी की जाएगी और काउंसलर द्वारा नियमित निगरानी की जाएगी।

तलाक के बाद पत्नी को मिलेगा भरण-पोषण

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया है, लेकिन अनावेदक उसे भरण-पोषण नहीं दे रहा है। आवेदिका ने तलाक की कॉपी भी संलग्न की, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि भरण-पोषण का अधिकार आवेदिका के पास सुरक्षित है। अनावेदक ने भरण-पोषण न देने का कारण खुद को बेरोजगार बताया और आवेदिका का स्त्रीधन भी वापस करने को तैयार नहीं था। आयोग की समझाइश पर अनावेदक प्रतिमाह 2 हजार रुपये भरण-पोषण देने के लिए सहमत हो गया। वह हर महीने की 10 तारीख तक यह राशि आवेदिका के खाते में तब तक जमा कराता रहेगा, जब तक आवेदिका दूसरा विवाह नहीं कर लेती। यदि आवेदिका आजीवन विवाह नहीं करती है, तो अनावेदक उसे आजीवन भरण-पोषण की राशि देगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अनावेदक की आर्थिक स्थिति में बदलाव होने पर भरण-पोषण की राशि में भी बदलाव किया जा सकता है। आयोग इस प्रकरण की नियमित निगरानी करेगा, ताकि आवेदिका को नियमित रूप से भरण-पोषण की राशि मिलती रहे।

देवर-देवरानी को घर छोड़ने का आदेश

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने शिकायत की कि उसके पति की मृत्यु के बाद अनावेदक (देवर-देवरानी) उसे घर पर रहने नहीं दे रहे थे और उन्होंने घर पर कब्जा कर लिया था। आयोग ने दोनों पक्षों को सुना। आयोग की समझाइश पर अनावेदक पक्ष इस बात के लिए तैयार हो गया कि आवेदिका अपने पति के नाम के मकान पर रह सकती है या उसे किराए पर दे सकती है।

omdarpanprmot-01
previous arrow
next arrow