रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय रासायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्य को 50-50 हजार टन यूरिया और डीएपी खाद का अतिरिक्त आवंटन करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला दिल्ली में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के सांसदों और अधिकारियों की केंद्रीय मंत्री नड्डा से मुलाकात के बाद आया।
खाद की वर्तमान स्थिति और अतिरिक्त मांग
बैठक के दौरान कृषि मंत्री नेताम और सांसदों ने केंद्रीय मंत्री नड्डा को बताया कि खरीफ सीजन में रोपा-ब्यासी के समय खाद की अतिरिक्त आवश्यकता होती है। उन्होंने विशेष रूप से अगस्त-सितंबर में धान की फसल के लिए फॉस्फेटिक खाद (डीएपी) की अधिक जरूरत पर जोर दिया। राज्य में माह जुलाई तक यूरिया की 5.99 लाख तथा डी.ए.पी. की 2.68 लाख मेट्रिक टन आपूर्ति निर्धारित थी, जिसके विरुद्ध यूरिया की 4.63 लाख तथा डी.ए.पी. की 1.61 लाख मेट्रिक टन मात्रा ही राज्य को प्राप्त हुई थी। माह अगस्त के लिए यूरिया की 57,600 मेट्रिक टन तथा डी.ए.पी. की 36,850 मेट्रिक टन का सप्लाई प्लान निर्धारित है। चूंकि इन उर्वरकों की सर्वाधिक आवश्यकता अगस्त माह में होती है, इसलिए अतिरिक्त 50-50 हजार मेट्रिक टन यूरिया और डीएपी की मांग की गई थी।
तत्काल निर्देश जारी, किसानों को राहत
किसानों की इस तात्कालिक जरूरत को समझते हुए, केंद्रीय मंत्री नड्डा ने उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों को छत्तीसगढ़ को अतिरिक्त खाद उपलब्ध कराने के लिए तत्काल निर्देश जारी किए। इस मुलाकात में लोकसभा सांसद संतोष पाण्डेय, विजय बघेल, कमलेश जांगड़े, रूपकुमारी चौधरी और राज्यसभा सांसद देवेंद्र बहादुर सिंह के साथ मार्कफेड प्रबंध संचालक किरण कौशल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस मंजूरी से खरीफ सीजन में किसानों को धान की अच्छी पैदावार लेने में मदद मिलेगी।
खाद भंडारण और वैकल्पिक उर्वरकों की उपलब्धता
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ वर्ष 2025 में भारत सरकार द्वारा यूरिया, डीएपी और एमओपी के भंडारण का लक्ष्य निर्धारित था। 11 अगस्त तक यूरिया का 6.72 लाख मेट्रिक टन, डीएपी का 2.14 लाख मेट्रिक टन और एमओपी का 80 हजार मेट्रिक टन भंडारण किया जा चुका है। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि डीएपी के प्रतिस्थापन के संबंध में वैकल्पिक उर्वरकों के रूप में एनपीके का 1.80 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 2.37 लाख मेट्रिक टन और एसएसपी का 2 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 2.95 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया गया है। इसका मतलब है कि डीएपी की कमी की पूर्ति के लिए पर्याप्त वैकल्पिक उर्वरक उपलब्ध हैं।









