Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

पति की मौत के बाद कर्ज में डूबी विधवा को बैंक से राहत दिलाने आयोग की पहल, दो माह का मिला समय

omdarpan

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

Omdarpan News Omdarpan News

रायपुर।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने आज रायपुर स्थित कार्यालय में महिला उत्पीड़न से जुड़े प्रकरणों की सुनवाई की। इस दौरान आयोग ने नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, बैंक ऋण माफी और वैवाहिक विवादों पर कड़े फैसले लेते हुए पक्षकारों को राहत देने का प्रयास किया। यह प्रदेश स्तर पर आयोग की 356वीं और रायपुर जिले की 172वीं जनसुनवाई थी।

नौकरी के नाम पर 31 लाख की ठगी, पुलिस को FIR के निर्देश

सुनवाई के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया, जिसमें एक महिला (अनावेदिका) ने चार अन्य महिलाओं को जिंदल कंपनी में नौकरी लगवाने का झांसा देकर कुल 31 लाख रुपये ठग लिए। अनावेदिका ने आवेदिका क्रमांक-1 से 6 लाख, क्रमांक-2 से 5 लाख, क्रमांक-3 से 10 लाख और क्रमांक-4 से 10 लाख रुपये लिए थे। पैसे लेने के बाद न तो नौकरी लगवाई गई और न ही रकम वापस की गई। मामला संज्ञान में आने पर आयोग ने इसे धोखाधड़ी और षड्यंत्र मानते हुए अनावेदिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। आयोग ने मामले को आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए थाना-सारागांव, जिला-जांजगीर-चांपा को प्रेषित कर दिया है।

कर्ज में डूबी विधवा को बैंक से राहत की उम्मीद

एक मानवीय प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसके पति ने 2015-16 में बैंक से व्यवसायिक लोन लिया था, लेकिन 2022 में पति की मृत्यु के बाद और आय का साधन न होने से वह किश्त नहीं चुका सकी। वर्तमान में आवेदिका स्कूल में ‘आया’ का काम कर अपने दो बच्चों, सास और लकवाग्रस्त ससुर का पालन-पोषण कर रही है। बैंक ने लोन के एवज में गिरवी रखे मकान के खाते को NPA घोषित कर दिया है। कुल बकाया मूलधन 11 लाख और ब्याज सहित 16 लाख रुपये है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने मानवीय आधार पर बैंक मैनेजर को आवेदिका की पारिवारिक स्थिति देखते हुए मूलधन में भी छूट दिलाने का प्रयास करने की समझाइश दी। बैंक ने ब्याज माफ कर केवल 11 लाख मूलधन जमा करने की बात कही थी, जबकि आवेदिका ने 6.5 से 7 लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा है। दोनों पक्षों को तैयारी के लिए दो महीने का समय दिया गया है।

शादी के 3 महीने बाद ही अलग हुए दंपती

एक अन्य मामले में दूसरे विवाह के बाद उपजे विवाद पर सुनवाई हुई। मई 2025 में हुए विवाह के महज तीन महीने बाद ही पति-पत्नी अलग रहने लगे। आवेदिका (पत्नी) साथ रहने को तैयार है, लेकिन अनावेदक (पति) एकमुश्त भरण-पोषण देकर तलाक चाहता है। पत्नी की मांग पर आयोग ने अनावेदक को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई में अपने माता-पिता के साथ उपस्थित हो, ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके।

omdarpanprmot-01
previous arrow
next arrow