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कर्तव्य पथ से राष्ट्रपति भवन तक छाया बस्तर का मंदार नृत्य, द्रौपदी मुर्मु ने की कलाकारों के समर्पण की सराहना
नई दिल्ली/रायपुर:
गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी के माध्यम से देश का दिल जीतने वाले कलाकारों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने का गौरव प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति से इस स्नेहपूर्ण मुलाकात के दौरान बस्तर के जनजातीय कलाकार भावविभोर और अभिभूत नजर आए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की झांकी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके माध्यम से देश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ है। कलाकारों के समर्पण, कड़ी मेहनत और जीवंत प्रस्तुति की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ कहकर उनका उत्साहवर्धन किया।
नारायणपुर के कलाकारों ने बिखेरा जादू
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से आए इन जनजातीय कलाकारों ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान छत्तीसगढ़ की झांकी के साथ पारंपरिक मंदार नृत्य की मनमोहारी प्रस्तुति दी थी। इस प्रस्तुति ने न केवल कर्तव्य पथ पर मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि देश-दुनिया का ध्यान भी बस्तर की कला की ओर आकर्षित किया।
कलाकारों के लिए अविस्मरणीय क्षण
मुलाकात के बाद कलाकारों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा मिला यह सम्मान उन्हें अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं को और अधिक निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की नई प्रेरणा देगा।
टीम लीडर तेज बहादुर भुवाल के नेतृत्व में नारायणपुर जिले के ग्राम नयनार से आए 13 सदस्यीय दल में जेनू राम सलाम, लच्छू राम, जैतू राम सलाम, राजीम सलाम, दिनेश करंगा, जयनाथ सलाम, मानसिंग करंगा, चन्द्रशेखर पोटाई, धनश्याम सलाम, जगनाथ सलाम, सुरेश सलाम और घोड़लापारा (ग्राम नयनार) निवासी दिलीप गोटा शामिल रहे।
उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की इस पारंपरिक कला टोली ने अपनी लोक-संस्कृति और विशिष्ट नृत्य शैली से राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की पहचान को और अधिक सशक्त किया है।









