नई दिल्ली/रायपुर (ओमदर्पण न्यूज़)।
“न रुके, न थके, न झुके—यही दृढ़ता, यही प्रतिबद्धता और यही राष्ट्रभक्ति आज भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जा रही है।” यह बातें भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहीं।
सरोज पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लगातार दी जा रही सेवाओं के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह निरंतरता अपने आप में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज देश एक ऐसे व्यक्तित्व और संकल्प के सानिध्य में कार्य कर रहा है, जिसने भारत के आधुनिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।
8,931 दिनों का निरंतर सफर: त्याग और तपस्या की पराकाष्ठा
सरोज पाण्डेय ने कहा, “एक नेता, एक विजन और एक इतिहास—ये शब्द केवल नारे नहीं हैं, बल्कि युग परिवर्तन की पहचान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8,931 दिनों का निरंतर, अविराम और अडिग सार्वजनिक जीवन पूर्ण कर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां गर्व के साथ याद रखेंगी।”
उन्होंने कहा कि यह केवल दिनों की संख्या नहीं है, बल्कि यह त्याग और तपस्या की पराकाष्ठा है। यह उन अनगिनत रातों की गवाही है जब पूरा देश सो रहा था, लेकिन देश के नेतृत्वकर्ता जाग रहे थे। यह उन कठोर निर्णयों की कहानी है, जो भले ही लोकप्रिय न रहे हों, लेकिन देशहित में बेहद आवश्यक थे।
संकट में भी अडिग रहा भारत
भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने भारत की वैश्विक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया वैश्विक महामारी से जूझ रही थी, तब भारत ने न केवल अपने नागरिकों की रक्षा की बल्कि दुनिया को वैक्सीन उपलब्ध कराकर मानवता की सेवा का नया अध्याय लिखा।
उन्होंने आगे कहा, “जब देश की सीमाओं पर चुनौतियां खड़ी हुईं, तब भारत ने झुकना नहीं, बल्कि डटकर सामना करना चुना। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में थी, तब भारत ने मजबूती से आगे बढ़ते हुए विश्व की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनाई।” उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का यह नया भारत आत्मनिर्भर, सशक्त और विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है।
पद से नहीं, परिश्रम से बनता है नेतृत्व
सरोज पाण्डेय ने कहा कि यह परिवर्तन अपने आप नहीं आया है, इसके पीछे एक दूरदर्शी नेतृत्व, स्पष्ट नीयत और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है। उनका समर्पण यह सिखाता है कि नेतृत्व पद से नहीं परिश्रम से बनता है, विश्वास शब्दों से नहीं कार्यों से अर्जित होता है और इतिहास अवसर से नहीं संकल्प से रचा जाता है।









