-
सुप्रीम कोर्ट ने समान अधिसूचना के आधार पर अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर मुआवजा बढ़ाया लेकिन 4427 दिन की देरी का ब्याज नहीं मिलेगा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित भूमि के मामलों में समान मुआवजा दर के सिद्धांत को लागू किया है। जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने 7 अगस्त को दिए फैसले में कर्नाटक के बागलकोट जिले के भूस्वामी किसानों का मुआवजा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया।
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 में प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किसानों के साथ पूर्ण न्याय करने के लिए यह आदेश दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता किसानों को वही मुआवजा मिलेगा जो 11 फरवरी 1999 की संबंधित अधिसूचना से जुड़े अन्य मामलों में वैधानिक लाभों सहित 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ पहले ही निर्धारित किया जा चुका है।
▬ किसानों ने किया अदालत का रुख ▬
भूमि अधिग्रहण अधिकारी के अवार्ड के बाद संदर्भ न्यायालय ने 2001 में मुआवजा 3 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया था। असंतुष्ट किसानों की अपील पर हाई कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया। इसके बाद किसानों ने समान अधिसूचना से अधिग्रहित जमीन पर पूर्व निर्धारित 6.5 लाख रुपये मुआवजे का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
▬ देरी के लिए नहीं मिलेगा ब्याज ▬
भूमि अधिग्रहण अथॉरिटी और राज्य सरकार ने दलील दी कि अपील में अत्यधिक देरी हुई है। अदालत ने माना कि हाई कोर्ट में अपील करने में 2383 दिन और सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने में 2044 दिन यानी कुल 4427 दिन की असामान्य देरी हुई। इस कारण अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजा बढ़ने के बावजूद किसानों को देरी की अवधि का ब्याज नहीं मिलेगा।








