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मेटावाड़ा की रैमती ने खेती और बिहान समूह से बनाई नई पहचान
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बच्चों की शिक्षा में कर रहीं मदद
✍️ डिजिटल डेस्क
बस्तर | बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के ग्राम मेटावाड़ा की रहने वाली रैमती मौर्य महतारी वंदन योजना के जरिए न केवल आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि अपने दो नातियों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग वे बच्चों के लिए पेन-कॉपी खरीदने और घर की छोटी जरूरतों को पूरा करने में कर रही हैं। रैमती का मानना है कि इस योजना ने महिलाओं को सशक्त बनाने और परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने का अवसर दिया है।
खेती और बिहान समूह से बढ़ाया मान
करीब 10 साल पहले राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बिहान समूह से जुड़ीं रैमती मौर्य फिलहाल अमृता स्व सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने क्लस्टर संगठन से आर्थिक मदद लेकर साग-सब्जी की खेती शुरू की है। वे अपनी उपज को स्थानीय तोकापाल साप्ताहिक बाजार और केशलूर में बेचकर नियमित आय कमा रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
रक्षाबंधन पर मिली 31वीं किस्त की सौगात
रक्षाबंधन से ठीक पहले महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त मिलने पर रैमती मौर्य ने विष्णु देव साय सरकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने इस मदद को बहनों के लिए मुख्यमंत्री की ओर से विशेष सौगात बताया। रैमती के अनुसार, बिहान समूह के माध्यम से आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने और महतारी वंदन योजना की राशि मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार के अन्य सदस्यों पर उनकी निर्भरता कम हुई है।









