मुंबई।
गैंगस्टर अबू सलेम की समय से पहले जेल से रिहाई की कोशिशों को इस हफ़्ते बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को साफ तौर पर बता दिया है कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार उसे 2030 से पहले रिहा नहीं किया जा सकता। सलेम 2005 से भारत की जेल में बंद है और लगातार अपनी रिहाई के लिए विभिन्न अदालतों के दरवाज़े खटखटा रहा है।
प्रत्यर्पण की शर्तें और सरकार का रुख
भारत ने पुर्तगाल को यह आश्वासन दिया था कि यदि अबू सलेम अपने खिलाफ लंबित मामलों में दोषी पाया जाता है, तो उसे मृत्युदंड या 25 साल से अधिक की जेल की सजा नहीं दी जाएगी। इसी शर्त के आधार पर 2005 में उसका प्रत्यर्पण संभव हो पाया था। सलेम को 2015 में बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या और 2017 में 1993 के मुंबई बम धमाकों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। सरकार का कहना है कि प्रत्यर्पण समझौते का पालन करते हुए उसे 25 साल की सजा पूरी करनी होगी।
अबू सलेम का आपराधिक इतिहास
अबू सलेम अब्दुल कयूम अंसारी, 4 नवंबर, 1993 को मुंबई बम विस्फोट मामले में मुंबई पुलिस द्वारा दायर पहली चार्जशीट में एक फरार आरोपी के रूप में नामित किया गया था। पुलिस के अनुसार, सलेम को हथियार ले जाने और छिपाने का काम सौंपा गया था और वह धमाकों की साजिश से जुड़ा था। 12 मार्च, 1993 को दाऊद इब्राहिम और उसके गिरोह द्वारा मुंबई में एक दर्जन बम विस्फोट किए गए थे, जिसमें 257 लोग मारे गए थे। सलेम इन बम धमाकों के साथ-साथ 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी वांछित अभियुक्त रहा। वह इन घटनाओं के बाद देश छोड़कर भाग गया था और अन्य अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा शुरू होने और खत्म होने तक फरार रहा।
कैसे हुआ प्रत्यर्पण?
जांचकर्ताओं को 2002 में बड़ी सफलता मिली जब सलेम को पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हिरासत में लिया गया। बताया गया कि उसने अपना रूप बदलने के लिए प्लास्टिक सर्जरी भी करवाई थी, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद उसके फिंगरप्रिंट के आधार पर उसकी पहचान हो पाई। एक साल बाद, पुर्तगाली सरकार ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को स्वीकार कर लिया। तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने पुर्तगाली अधिकारियों को आश्वासन दिया कि सलेम को मृत्युदंड या 25 साल से अधिक की जेल की सजा नहीं दी जाएगी। आखिरकार, 11 नवंबर, 2005 को सलेम को भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया और उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और आतंकवादी एवं विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) की धाराओं के तहत मुकदमा चला।
सलेम की रिहाई की मांग का आधार
महाराष्ट्र की एक जेल में बंद सलेम पिछले कुछ सालों से निचली अदालत, बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न प्राधिकारियों से अपनी रिहाई की तारीख मांग रहा है। वह दावा कर रहा है कि उसे एक कैदी को मिलने वाले सभी लाभ, जैसे कि सजा में छूट, पाने का हक है। उसका तर्क है कि जेल में बिताए गए समय के आधार पर, वह 3 साल और 16 दिन की छूट का हकदार है। इसके अतिरिक्त, वह यह भी दावा कर रहा है कि सितंबर 2002 से पुर्तगाल में हिरासत में बिताए गए समय को मिलाकर, वह 25 साल से अधिक जेल में बिता चुका है और उसे 31 मार्च, 2025 को रिहा किया जाना चाहिए था। इन गणनाओं के आधार पर, सलेम ने कई बार पुर्तगाली अधिकारियों, महाराष्ट्र कारागार विभाग, राज्य सरकार और अदालतों को पत्र लिखकर अपने प्रत्यर्पण की शर्तों के उल्लंघन का दावा किया है।









