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भ्रामक विज्ञापनों पर रोक, विज्ञापनदाताओं को देना होगा स्व-घोषणा प्रमाणपत्र: सर्वोच्च न्यायालय

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  • आयुष औषधि निर्माता, विज्ञापनदाता और एजेंसियों को विज्ञापन प्रसारण से पहले नियमों के पालन की होगी अनिवार्यता

नई दिल्ली/रायपुर। उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय ने अहम निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत, आयुष औषधि निर्माता, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसियों को अब अपने विज्ञापनों के प्रसारण, प्रकाशन या प्रदर्शन से पहले स्व-घोषणा प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होगा।

यह प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करेगा कि विज्ञापन केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के तहत निर्धारित विज्ञापन कोड का उल्लंघन नहीं करता है। इस प्रक्रिया के तहत, संबंधित विज्ञापनदाताओं को प्रसारक, प्रिंटर, प्रकाशक, टीवी चैनल, और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अपलोड किए गए स्व-घोषणा का प्रमाण रिकार्ड में रखना होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 07 मई 2024 के आदेश में स्पष्ट किया कि यह कदम इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में भ्रामक विज्ञापन पर अंकुश लगाने और उपभोक्ता हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

इस आदेश के अनुपालन में, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रसारण सेवा पोर्टल और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पोर्टल पर स्व-घोषणा अपलोड करने की सुविधा शुरू की है। यह पोर्टल 04 जून 2024 से चालू है और विज्ञापनदाता अपने विज्ञापन को प्रसारित या प्रकाशित करने से पहले स्व-घोषणा अपलोड कर सकते हैं।

 

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