उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनी को राहत देने से किया इनकार, कहा- देश की छवि को हुआ नुकसान
नई दिल्ली।
उज्बेकिस्तान में भारतीय कफ सिरप के कथित सेवन से 18 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने संबंधित फार्मास्युटिकल कंपनी को आड़े हाथों लेते हुए पूछा, “क्या आप समझते हैं कि इससे देश की छवि को कितना नुकसान हुआ है? क्या आप केवल पैसे के लिए इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हैं?”
हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार
न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कंपनी और उसके अधिकारियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। इन याचिकाओं में गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा जनवरी 2024 में जारी किए गए समन आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला नोएडा में ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई एक शिकायत से जुड़ा है। कंपनी पर “मानक गुणवत्ता” के अनुरूप नहीं पाई गई दवाओं के निर्माण और बिक्री सहित कई गंभीर उल्लंघनों का आरोप है।
अदालत में तीखी बहस
सुनवाई के दौरान कंपनी और उसके अधिकारियों के वकील ने तर्क दिया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि सिरप के सेवन से ही मौतें हुई हैं। इस पर पीठ ने दोबारा देश की प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए पूछा कि क्या कंपनी को इस बात का अंदाजा है कि इस प्रकरण से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को कितनी क्षति पहुँची है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नोएडा में दायर शिकायत के आधार पर ही यह समन जारी किया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उचित ठहराया है।






