16 अक्टूबर 2026 |
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धान कटाई के बाद पराली जलाने पर प्रशासन सख्त, किसानों से वैकल्पिक उपाय अपनाने की अपील

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OM Darpan

Nov 13, 2025 09:22 am 299 views
धान कटाई के बाद पराली जलाने पर प्रशासन सख्त, किसानों से वैकल्पिक उपाय अपनाने की अपील

  • कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर कृषि विभाग की निगरानी

  • पराली प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर और बायो डी-कम्पोजर के उपयोग पर जोर

बलौदाबाजार।
जिले में धान फसल की कटाई के साथ ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देशानुसार कृषि विभाग ने किसानों को पराली न जलाने और आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से उसका प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया है।


पराली जलाने से वायु प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता पर असर

धान कटाई के बाद किसान पराली (पैरा) को खेतों में जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मृदा की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और खेत की सतह कठोर हो जाती है, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है।


हैप्पी सीडर और बेलर मशीन का उपयोग बढ़ावा

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि हैप्पी सीडर मशीन से पराली जलाए बिना गेहूं जैसी रबी फसलों की सीधी बुवाई संभव है। यह मशीन पराली को काटकर खेत में बिखेर देती है, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम होते हैं।
वहीं, बेलर मशीन से धान कटाई के बाद बचे पैरा को गोल या चौकोर बंडल में इकट्ठा किया जा सकता है, जिसे पशु चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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कम्पोस्ट खाद बनाने को बढ़ावा

कृषि विभाग द्वारा किसानों को बायो डी-कम्पोजर वितरित किया जा रहा है, जिससे पराली को कम्पोस्ट खाद में बदला जा सके। यह खाद रबी फसलों में उपयोगी साबित होगी और खेत की उर्वरता भी बनाए रखेगी।


प्रत्येक ग्राम में निगरानी दल गठित

पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन ने हर ग्राम में निगरानी दल गठित किया है। इसमें पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सचिव और कोटवार शामिल हैं।
यह दल खेतों का निरीक्षण कर किसानों को पराली प्रबंधन, पशुचारा तैयार करने और कम्पोस्ट खाद बनाने के संबंध में जागरूक करेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान होता है, इसलिए किसान आधुनिक मशीनों और जैविक तरीकों को अपनाकर प्रदूषण रोकने में सहयोग दें।

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