Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव को तगड़ा झटका! ‘जमीन के बदले नौकरी’ केस में FIR रद्द करने से इनकार, अब क्या करेगा परिवार?

Lalu Yadav Supreme Court

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

नई दिल्ली (ओमदर्पण न्यूज़)।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land for Job Scam) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) और चार्जशीट रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने लालू यादव को एक मामूली राहत देते हुए अधीनस्थ अदालत (ट्रायल कोर्ट) की कार्यवाही में व्यक्तिगत पेशी से छूट प्रदान की है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि लालू यादव को ट्रायल कोर्ट में पेश होने की जरूरत नहीं है। सुनवाई के दौरान लालू यादव के वकीलों की तरफ से तर्क दिया गया था कि सीबीआई (CBI) ने उन पर मुकदमा चलाने के लिए कोई सक्षम कानूनी मंजूरी नहीं ली है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे इस मुद्दे को निचली अदालत के समक्ष उठा सकते हैं। आरजेडी नेता ने यह भी दलील दी थी कि उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द होनी चाहिए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। इससे पहले इस मामले में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से भी झटका लग चुका है।

क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला?

यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर नौकरियां बांटीं और इसके एवज में अभ्यर्थियों से औने-पौने दाम पर जमीनें अपने और अपने परिवार के नाम लिखवा लीं। नौकरी पाने वाले ज्यादातर लोग लालू यादव के निर्वाचन क्षेत्र से ही जुड़े थे। इस मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और बेटे तेजस्वी यादव का भी नाम शामिल है।

600 करोड़ का लेनदेन और ‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ की टिप्पणी

इस घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2023 में दावा किया था कि इस पूरे मामले में लगभग 600 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। वहीं, इसी साल जनवरी 2026 में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्पेशल कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए एक बेहद तीखी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार के अन्य लोगों ने एक ‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ (आपराधिक गिरोह) की तरह काम किया है।

अदालत ने लालू यादव समेत अन्य 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप भी तय किए थे। यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील रहा है। विरोधी पार्टियां चुनाव के वक्त इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाती रही हैं, जिसका सियासी नुकसान लालू परिवार को समय-समय पर उठाना पड़ा है।


omdarpanprmot-01
previous arrow
next arrow