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मैंग्रोव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम: विजयवाड़ा में जुटे देश भर के विशेषज्ञ, मिष्टी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन पर बनी रणनीति

Omdarpan News

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विजयवाड़ा/नई दिल्ली।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में ‘मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम’ (मिष्टी) योजना पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। 8 और 9 जनवरी, 2026 को आयोजित इस कार्यशाला में मैंग्रोव संरक्षण और तटीय आजीविका के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई।

उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने किया उद्घाटन

कार्यशाला का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण ने किया। अपने संबोधन में श्री कल्याण ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव का भी विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने मिष्टी योजना के माध्यम से राज्यों को मैंग्रोव संरक्षण में सहयोग प्रदान किया है।

मैंग्रोव संरक्षण और आजीविका पर जोर

कार्यशाला में वन अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सतत मैंग्रोव संरक्षण और उनके पुनर्स्थापन (Restoration) पर गहन विचार-विमर्श किया गया। राष्ट्रीय क्षतिपूर्ति वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (राष्ट्रीय कैम्पा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री आनंद मोहन ने एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी।

आनंद मोहन ने मिष्टी पहल के उद्देश्यों और इसके कार्यान्वयन ढांचे पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मिष्टी का मुख्य उद्देश्य मैंग्रोव इकोसिस्टम का विकास और संरक्षण करना है। इसमें निम्न बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया है:

  • मैंग्रोव बहाली और तटरेखा का संरक्षण।

  • जैव विविधता का संरक्षण।

  • तटीय समुदायों के लिए ठोस आजीविका के अवसर पैदा करना।

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अहम भूमिका

राष्ट्रीय कैम्पा के सीईओ ने अपनी प्रस्तुति में जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलेपन, तटीय संरक्षण और टिकाऊ आर्थिक लाभों में मैंग्रोव की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

गौरतलब है कि यह मिशन ‘जलवायु के लिए मैंग्रोव गठबंधन’ (MAC) के उद्देश्यों में भी योगदान देता है, जिसमें भारत संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिषद सम्मेलन (UNFCCC) के COP-27 के दौरान एक सक्रिय सदस्य बना था। यह कार्यशाला ज्ञान साझा करने, सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने और नीतिगत संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई है।


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