15 सितम्बर 2026 |
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14 लाख की हैचरी से 15 टन मछली उत्पादन, बिरकोनी के किसान ने बदली आय की राह

OM Darpan

Sep 15, 2026 11:50 pm 651 views
14 लाख की हैचरी से 15 टन मछली उत्पादन, बिरकोनी के किसान ने बदली आय की राह

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से 150 किसानों को मिला अनुदान, पारंपरिक खेती के साथ शुरू किया व्यवसाय

महासमुंद। महासमुंद जिले के किसानों ने धान की पारंपरिक खेती के साथ अब मछली पालन को आय और रोजगार का नया जरिया बना लिया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले के करीब 150 किसान इस व्यवसाय से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। किसी ने तालाब बनाकर काम शुरू किया तो किसी ने हैचरी और पाउंड लाइनर यूनिट स्थापित की है।

बिरकोनी के किसान दिनेश चन्द्राकर ने खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए मछली पालन शुरू किया। उन्होंने योजना के तहत 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब और 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी स्थापित की है। सरकारी अनुदान से उन्हें व्यवसाय विस्तार में मदद मिली।

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दिनेश के अनुसार हैचरी में तैयार मछली के बच्चे तालाब में डाले जाते हैं। करीब 8 से 9 महीने में 15 टन तक मछली तैयार होती है। एक किलो मछली पर 70 से 80 रुपए की लागत आती है, जबकि बाजार में यह 120 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिकती है। तैयार मछली को मछुआरों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है।

28 लाख के प्रोजेक्ट पर 60% सब्सिडी

बकमा के हिमांशु चंद्राकर ने 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराई हैं। सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद अब उन्हें सभी खर्च काटकर सालाना 3 से 4 लाख रुपए की बचत हो रही है। अब मछली पालन उनके परिवार की आय का स्थायी जरिया बन गया है।

मजदूरों को गांव में ही 9 हजार वेतन

मछली पालन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार भी बढ़ा है। बिरकोनी में मजदूरों को अब गांव में ही नियमित काम मिल रहा है। मजदूरों के मुताबिक पहले रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही सालभर काम मिल रहा है। इससे उन्हें करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह की आय हो रही है।

महिलाओं और एससी-एसटी को 60% अनुदान

योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग को 60 प्रतिशत और सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। जिले में अब तालाब के साथ बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण जैसे बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है। इससे किसानों को पूरी सप्लाई चेन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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