21 अक्टूबर 2026 |
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दिल्ली के व्यापार मेले में दिखेगी छत्तीसगढ़ की 'विकास और विरासत' की झलक

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OM Darpan

Oct 21, 2026 11:52 pm 366 views
दिल्ली के व्यापार मेले में दिखेगी छत्तीसगढ़ की 'विकास और विरासत' की झलक


रायपुर। नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर तक आयोजित होने वाले 45वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में इस बार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, मिलेट और औद्योगिक प्रगति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मेले की तैयारियों को लेकर मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई।

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मुख्य सचिव ने अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर पवेलियन निर्माण, सुरक्षा, ब्रांडिंग और अन्य व्यवस्थाएं पूरी गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इस वर्ष मेले की थीम 'विकास और विरासत' रखी गई है, जिसके अनुरूप राज्य की आधुनिक प्रगति और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर तालमेल प्रदर्शित किया जाएगा। यह आयोजन राज्य के हस्तशिल्पियों, उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंच साबित होगा।


मिलेट और हर्बल उत्पादों का रहेगा आकर्षण

कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को राज्य के प्रमुख मिलेट उत्पादों जैसे कोदो, कुटकी और रागी का आकर्षक ढंग से प्रदर्शन करने को कहा गया है। वहीं, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को लघु वनोपज संघ के जरिए ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।


नवीन औद्योगिक नीति का होगा प्रचार-प्रसार

पवेलियन के नोडल विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग को राज्य की 'नवीन औद्योगिक विकास नीति 2024-2030' तथा विभिन्न निवेश योजनाओं के व्यापक प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है। पर्यटन विभाग राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी प्रदर्शित करेगा। इसके अलावा ग्रामोद्योग विभाग हथकरघा बुनकर सहकारी संघ और 'शबरी' के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन व विक्रय सुनिश्चित करेगा।


राज्य दिवस पर होंगे भव्य सांस्कृतिक आयोजन

मेले में 14 से 18 नवंबर तक का समय विशेष रूप से व्यावसायिक और व्यापारिक आगंतुकों के लिए आरक्षित रहेगा। वहीं, आम जनता 27 नवंबर तक इसका अवलोकन कर सकेगी। मेले के दौरान छत्तीसगढ़ पवेलियन में आयोजित होने वाले 'राज्य दिवस' पर प्रदेश के लोक कलाकार भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। संस्कृति विभाग को इसकी रूपरेखा तैयार कर अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदेश की उत्कृष्ट कला की प्रभावी झलक प्रस्तुत की जा सके।

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