16 अक्टूबर 2026 |
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तांदुला सिंचाई परियोजना से बढ़ा सिंचाई रकबा

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OM Darpan

Oct 17, 2026 01:05 am 365 views
तांदुला सिंचाई परियोजना से बढ़ा सिंचाई रकबा

तांदुला सिंचाई परियोजना से बढ़ा सिंचाई रकबा


  • राज्य गठन के बाद 97 से बढ़कर 118 हुईं सिंचाई परियोजनाएं

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  • 1349 किलोमीटर तक फैला नहरों का जाल

  • 42 हजार किसानों को मिला सीधा लाभ


दुर्ग

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद बीते 25 वर्षों में तांदुला जल संसाधन संभाग दुर्ग ने सिंचाई विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2000 में जहां केवल 97 सिंचाई परियोजनाएं संचालित थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 118 हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विभाग ने नहरों की लंबाई 1148 किलोमीटर से बढ़ाकर 1349 किलोमीटर कर दी है। इसके परिणामस्वरूप अविभाजित दुर्ग जिले में सिंचाई का रकबा 87 हजार 930 हेक्टेयर से बढ़कर 1 लाख 13 हजार 538 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।


बड़ी परियोजनाओं से 18 हजार हेक्टेयर में सिंचाई

दुर्ग-बालोद अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी जलापूर्ति के लिए 1520 करोड़ रुपए की खरखरा-शिवनाथ नदी पाइपलाइन योजना और 238 करोड़ रुपए की तांदुला ऑगुमेंटेशन सहगांव उद्वहन सिंचाई योजना शुरू की गई है। इन विशाल परियोजनाओं से 18 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। उद्वहन सिंचाई योजनाओं के माध्यम से ऊंचाई वाले क्षेत्रों और अंतिम छोर के खेतों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा भू-जल पुनर्भरण के लिए इस वर्ष 265 रिचार्ज पिट और 300 सोक पिट का निर्माण भी किया गया है।


42 हजार किसानों को लाभ- उपज में 40 प्रतिशत तक वृद्धि

संभाग के इन प्रयासों से 42 हजार से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष रूप से सिंचाई सुविधा का लाभ मिला है। खेतों तक पानी पहुंचने से फसल उत्पादकता में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप प्रणाली के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जलाशयों की डी-सिल्टिंग, मरम्मत और आधुनिकीकरण से जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि हुई है। महिला एवं स्व-सहायता समूहों की भागीदारी से जल प्रबंधन को सामुदायिक स्वरूप दिया गया है।


ड्रोन और आरटीएमएस से नहरों की निगरानी

जल प्रबंधन में पारदर्शिता और सटीकता के लिए विभाग ने डिजिटल तकनीक का उपयोग शुरू किया है। डीजीपीएस, ड्रोन सर्वेक्षण और जीआईएस मानचित्रण के जरिए सटीक स्थल सर्वेक्षण किए जा रहे हैं। नहरों और जलाशयों की रियल टाइम निगरानी के लिए आरटीएमएस लागू किया गया है। ई-ऑफिस और ऑनलाइन प्रोजेक्ट ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से कार्यों में पारदर्शिता लाई गई है। सिंचाई सुविधा बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी आई है और स्थिर आजीविका में वृद्धि हुई है।


जल नीति 2025 और भविष्य का रोडमैप

प्रशासनिक सुधार के तहत वर्तमान में जल नीति 2025 के अंतर्गत जल के सतत उपयोग और मूल्य निर्धारण पर काम किया जा रहा है। राज्य स्तर पर जल डेटा पोर्टल के माध्यम से सभी आंकड़े सार्वजनिक कर दिए गए हैं। भविष्य की योजनाओं के तहत विभाग माइक्रो सिंचाई प्रणाली, नहरों के आधुनिकीकरण, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंपों के विस्तार और एनीकट को बैराज में बदलने की योजना पर काम कर रहा है। विभाग का लक्ष्य औद्योगिक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति की आत्मनिर्भर प्रणाली विकसित करना है।

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