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महानदी जल विवाद को लेकर नई दिल्ली में बैठक, आपसी सहमति और वैज्ञानिक आधार पर निकलेगा समाधान

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OM Darpan

Oct 01, 2026 11:41 pm 647 views
महानदी जल विवाद को लेकर नई दिल्ली में बैठक, आपसी सहमति और वैज्ञानिक आधार पर निकलेगा समाधान

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से लंबित महानदी जल विवाद के समाधान के लिए नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हिस्सा लिया।


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बैठक में दोनों राज्यों ने महानदी के जल बंटवारे और इससे जुड़े मुद्दों पर अपना-अपना पक्ष रखा। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील और ओडिशा के मुख्य सचिव सहित दोनों राज्यों व केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


छत्तीसगढ़ ने रखा अपना पक्ष

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की जीवनधारा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका समाधान टकराव के बजाय सहयोग, विश्वास और वैज्ञानिक आधार पर निकलना चाहिए। साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा राज्य में है। इसलिए प्रदेश की कृषि, पेयजल और आदिवासी अंचलों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाना जरूरी है।


मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ अपने हितों के साथ ओडिशा की जरूरतों का भी सम्मान करता है। राज्य सरकार हीराकुंड जलाशय के सुचारु संचालन के लिए सहयोग के लिए तैयार है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग के पारदर्शी व तकनीकी आकलन पर भरोसा जताया।


सहकारी संघवाद और बस्तर मॉडल का जिक्र

विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार की मध्यस्थता का स्वागत करते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना से जटिल मुद्दों के समाधान का माहौल बना है। उन्होंने बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य के बीच बने समन्वय का उदाहरण देते हुए उम्मीद जताई कि इसी तरह की इच्छाशक्ति से महानदी विवाद का भी हल निकाला जा सकता है।


सांस्कृतिक संबंधों का हवाला

मुख्यमंत्री ने दोनों राज्यों के बीच सामाजिक व सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए महाप्रभु जगन्नाथ और शिवरीनारायण से पुरी तक के जुड़ाव की बात कही। उन्होंने कहा कि महानदी को विवाद की रेखा नहीं, बल्कि विकास और सहयोग की धारा बनाना सामूहिक जिम्मेदारी है।


वर्ष 2018 में गठित महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण की प्रक्रिया के समानांतर आपसी संवाद और तकनीकी विमर्श के जरिए स्थायी हल निकालने के प्रयास जारी रहेंगे।

छत्तीसगढ़ की ओर से बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

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