22 अक्टूबर 2026 |
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जनहित के कार्यों में बाधा न बनें राजनीतिक मतभेद, विकसित भारत के लिए विधिक सुधार जरूरी

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OM Darpan

Oct 22, 2026 08:02 pm 422 views
जनहित के कार्यों में बाधा न बनें राजनीतिक मतभेद, विकसित भारत के लिए विधिक सुधार जरूरी


नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि व्यापक जनहित के कार्यों में राजनीतिक मतभेद कभी आड़े नहीं आने चाहिए। उन्होंने 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत कानूनों, पारदर्शी संस्थाओं और सभी के लिए न्याय को बेहद जरूरी बताया है। उपराष्ट्रपति विज्ञान भवन में भारतीय विधि आयोग द्वारा आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

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'सहकारी संघवाद और विधिक सुधार राष्ट्रीय एवं राज्य परिप्रेक्ष्य' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत 'विविधता में एकता' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'टीम इंडिया' की परिकल्पना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और साझा जिम्मेदारी की भावना पर आधारित है। हमारा संविधान केंद्र की शक्तियों और राज्यों की स्वायत्तता के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाता है।


राज्यों से पुराने कानून खत्म करने की अपील

न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 1,700 से अधिक अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त किया गया है और अंग्रेजों के जमाने के तीन आपराधिक कानूनों को भी बदला गया है। उन्होंने राज्यों के विधि आयोगों से भी आग्रह किया कि वे अपने यहां के पुराने कानूनों की पहचान कर उन्हें खत्म करने या संशोधन की सिफारिश करें, ताकि प्रशासन को कुशल बनाया जा सके और आम जनता का जीवन आसान हो।


एकरूपता थोपना नहीं है सहकारी संघवाद का मतलब

उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि कानूनी सुधारों में सहकारी संघवाद का यह अर्थ कतई नहीं है कि हर मामले में एकरूपता थोप दी जाए। जहां केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारियां जुड़ती हैं, वहां दोनों को मिलकर काम करना चाहिए, लेकिन राज्यों की उन स्वतंत्रताओं को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए जिससे वे अपनी विशिष्ट जरूरतें पूरी करते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य विधि आयोगों व विधि विभागों के बीच बेहतर तालमेल और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने का आह्वान किया।


सेंगोल और संत तिरुवल्लुवर का किया जिक्र

संसद भवन में स्थापित 'सेंगोल' को धर्मसम्मत सत्ता और नैतिक शासन का प्रतीक बताते हुए उन्होंने तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं का भी स्मरण किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी सफलता और समृद्धि का आधार केवल सत्ता का प्रयोग नहीं, बल्कि सुशासन है।


इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, भारतीय विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, आयोग की सदस्य-सचिव डॉ. अंजू राठी राणा और सदस्य प्रो. डी. पी. वर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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