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चौथे दिन भी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, कर्मचारियों की मांगों को बताया जायज
दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
दुर्ग में सहकारी समिति कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज चौथे दिन भी जारी रही। हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में अब राजनीतिक और किसान संगठन भी खुलकर सामने आ गए हैं। मानस भवन के पास धरना स्थल पर कांग्रेस और किसान संगठनों के नेताओं ने पहुंचकर आंदोलनकारियों का समर्थन किया।
धरना स्थल पर दुर्ग जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्ता और किसान नेता रवि प्रकाश ताम्रकार उपस्थित रहे। सभी ने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताया और सरकार से तत्काल समाधान की मांग की।
राकेश ठाकुर बोले — “कांग्रेस सरकार ने राहत दी थी, अब कर्मचारियों को आंदोलन पर मजबूर किया जा रहा”
राकेश ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में सहकारी समितियों को सूखत (सूखा राहत) देने की मांग आई थी, जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्ष 2022 में ढाई सौ करोड़ रुपए का राहत पैकेज जारी किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो सालों से कई जिलों की समितियों को बारिश से पहले धान उठाव न होने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन भाजपा सरकार अब तक कोई राहत नहीं दे पाई है।
किसान संगठन ने धान खरीदी में देरी पर उठाए सवाल
राजकुमार गुप्ता ने कहा कि “डबल इंजन की सरकार में जानबूझकर धान खरीदी में देरी की जा रही है।” उन्होंने कहा कि इससे किसान मौसम की मार झेल रहे हैं और आर्थिक संकट में फंस रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि सहकारी समिति कर्मचारियों को प्रबंधकीय पद की बजाय सीधे नियमितिकरण दिया जाए और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में भर्ती में उन्हें प्राथमिकता मिले।
कर्मचारी सेवा नियम में संशोधन की मांग
किसान नेता रवि प्रकाश ताम्रकार ने कहा कि वर्ष 2018 में बनाए गए कर्मचारी सेवा नियमों में आज तक कोई संशोधन नहीं हुआ है, जबकि विधायकों के वेतन और भत्तों में लगातार वृद्धि की जा रही है।
उन्होंने कहा कि समितियाँ किसानों के शेयर से चल रही हैं, इसलिए सरकार को कर्मचारियों और किसानों दोनों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
इस दौरान कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष रिवेन्द्र यादव, जनपद उपाध्यक्ष राकेश हिरवानी सहित बड़ी संख्या में सहकारी समिति कर्मचारी धरना स्थल पर मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।











