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नक्सल प्रभावित क्षेत्र पूवर्ती और टेकलगुड़ियम में ‘गुरुकुल’ स्कूल की स्थापना: शिक्षा की अलख जला रहे CRPF जवान

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सुकमा (कौशल संदुजा)।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में शिक्षा का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) 150 बटालियन ने गुरुकुल नाम से एक स्कूल की स्थापना की है, जिससे यहां के बच्चों को शिक्षा की दिशा में एक नया अवसर मिला है। इस स्कूल की शुरुआत श्री राकेश अग्रवाल, आई.पी.एस., महानिरीक्षक छत्तीसगढ़ सेक्टर के मार्गदर्शन और श्री आनन्द सिंह राजपुरोहित, पुलिस उपमहानिरीक्षक सुकमा रेंज की देखरेख में की गई। स्कूल का संचालन श्री राकेश चन्द्र शुक्ला, कमांडेंट 150 बटालियन के नेतृत्व में किया जा रहा है।

नक्सलवाद से प्रभावित इस क्षेत्र में शिक्षा का यह कदम स्थानीय बच्चों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित हो सकता है। स्कूल का उद्देश्य बच्चों को न केवल शिक्षा प्रदान करना है, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक विकास के लिए विभिन्न गतिविधियां भी उपलब्ध कराना है। स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के अलावा स्कूल यूनिफार्म, किताबें, बैग, जूते, और खेलकूद के लिए बॉलीबॉल, फुटबॉल, और बास्केटबॉल जैसे खेलों की सुविधा दी गई है।

श्री एस. एस. हॉकीप, द्वितीय कमान अधिकारी, श्री विकास कुमार राय, द्वितीय कमान अधिकारी, श्री अमरेश कुमार घोष, उप कमाण्डेन्ट, श्री भैरव प्रसाद, उप कमाण्डेन्ट, श्री अजय त्यागी, सहायक कमाण्डेन्ट, श्री मुकेश कुमार सिंह, सहायक कमाण्डेन्ट, श्री चन्द्र प्रकाश तिवारी, सहायक कमाण्डेन्ट, श्री रवि चन्दर, सहायक कमाण्डेन्ट, और श्री राकेश कुमार शर्मा, सहायक कमाण्डेन्ट की निगरानी में इस पहल का संचालन किया जा रहा है।

गुरुकुल स्कूल में बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा में न केवल प्राथमिक शिक्षा शामिल है, बल्कि उनके समग्र विकास के लिए चार्ट, बोर्ड और दीवारों पर शिक्षण सामग्री का भी प्रबंध किया गया है। साथ ही, एक Big Display (television) और projector की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे बच्चों का शिक्षा अनुभव और भी प्रभावी हो सके।

इसके अलावा, शौचालय, बाथरूम और हैंडपंप की सुविधा भी स्कूल में उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके लिए जिला प्रशासन से बातचीत चल रही है। भविष्य में गुरुकुल को बारहवीं कक्षा तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है।

यह पहल सुकमा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक नया बदलाव लेकर आई है, जहां पहले नक्सलवाद के कारण बच्चों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ता था। अब, गुरुकुल स्कूल की स्थापना से बच्चे गांव में रहकर ही शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और उन्हें घर की देखभाल करने के बजाय शिक्षा के लाभ मिलेंगे।

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