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विवादित संस्था को फिर मिला सरकारी सहयोग

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  • संस्कृति विभाग पर NSUI ने लगाया पक्षपात का आरोप

  • NSUI ने मांगी उच्च-स्तरीय जांच


रायपुर।


छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विभाग पर सांईनाथ फाउंडेशन नामक एक संस्था को लगातार आर्थिक सहयोग देने का आरोप लगा है, जिसे पहले भी विवादों के कारण रद्द किया जा चुका था। NSUI जिला अध्यक्ष शान्तनु झा ने संस्कृति विभाग के संचालक को पत्र लिखकर 17 अगस्त को रायपुर में होने वाले ‘तिरंगा तोला नमन’ कार्यक्रम के लिए दिए गए अनुदान की तत्काल जांच करने और उसे रद्द करने की मांग की है।

झा ने अपने पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि संस्कृति विभाग बिना किसी निर्धारित मापदंड के सांईनाथ फाउंडेशन को लगातार विशेष आर्थिक सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब है जब छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं को सरकारी मदद से वंचित रखा जाता है। NSUI ने यह भी आरोप लगाया कि सांईनाथ फाउंडेशन केवल छत्तीसगढ़ी नाम का इस्तेमाल करती है, जबकि उनके कार्यक्रमों में मंच पर हिंदी भाषी बाहरी राज्यों के कवियों को प्राथमिकता दी जाती है। झा के अनुसार, यह सब ‘सुनियोजित सांठगांठ’ के तहत किया जा रहा है।

पुराना विवाद फिर सुर्खियों में

NSUI ने इस बात पर जोर दिया कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सांईनाथ फाउंडेशन विवादों में घिरी है। संगठन ने याद दिलाया कि पूर्व में भी यह संस्था विवादित हुई थी, जिसके बाद संस्कृति विभाग ने इसके एक आयोजन को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद, अब विभाग का अचानक रुख बदलना और एक बार फिर इसी संस्था को आर्थिक सहयोग देना, विभागीय भ्रष्टाचार और पक्षपात की ओर साफ इशारा करता है।

स्थानीय कलाकारों की हो रही उपेक्षा: शान्तनु झा

शान्तनु झा ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “जब छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकार और संगठन विभाग की मदद के लिए दर-दर भटकते हैं, तब एक विवादित संस्था को लगातार सरकारी आर्थिक सहयोग मिलना समझ से परे है।” उन्होंने कहा कि यह स्थानीय प्रतिभाओं के साथ अन्याय है।

NSUI ने दी आंदोलन की चेतावनी

NSUI ने संस्कृति विभाग को चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और सांईनाथ फाउंडेशन को दिए गए अनुदान को रद्द नहीं किया गया, तो संगठन संस्कृति विभाग के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।

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