14 सितम्बर 2026 |
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स्थानीय चुनाव: मतदाता सूची में नए नामों के आवेदन निरस्त होने पर भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से की मुलाकात

OM Darpan

Nov 12, 2024 06:31 am 151 views
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मतदाता सूची में नाम जोड़ने का मुद्दा

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भिलाई (रोहितास सिंह भुवाल)।  आगामी नगरीय निकाय चुनाव के लिए नगर निगम क्षेत्र के 60 वार्डों के मतदान केंद्रों में 16 से 30 अक्टूबर तक नए नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के लिए दावा-आपत्ति शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान लगभग दो हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें निर्धारित पात्रता होने के बावजूद अधिकांश नए नाम जोड़ने के सभी आवेदन स्थानीय निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा निरस्त कर दिए गए। इस फैसले से कई मतदाता आगामी निकाय चुनाव में अपने मताधिकार का उपयोग करने से वंचित हो सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर आज भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी को ज्ञापन सौंपा। भाजपा नेताओं ने सभी निरस्त आवेदनों को स्वीकृत कर मतदाता सूची में नाम जोड़ने की मांग की। कलेक्टर से मिलने वालों में भाजपा नगरीय निकाय चुनाव सदस्य एवं पूर्व सभापति दिनेश देवांगन, उप नेता प्रतिपक्ष देवनारायण चंद्राकर, मंडल अध्यक्ष डॉ. सुनील साहू, पार्षद कांशीराम कोसरे, चंद्रशेखर चंद्राकर, अरुण सिंह, मनीष साहू, अजीत वैद्य, शशि साहू, कमल देवांगन, खिलावन मटियारा, द्वारिका साहू, जग्गी शर्मा, कुलेश्वर साहू, भास्कर तिवारी और नरेंद्र ठाकुर शामिल थे। भाजपा नेताओं ने ज्ञापन में बताया कि प्रारंभिक मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद 16 से 30 अक्टूबर तक सभी मतदान केंद्रों पर नए मतदाताओं का नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए थे। इसमें वे स्थानीय नागरिक भी शामिल थे जिनकी आयु 1 जनवरी 2024 तक 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी थी, लेकिन वे किसी कारणवश लोकसभा या विधानसभा चुनाव में अपना नाम नहीं जुड़वा पाए थे या उनका नाम पिछली सूची से विलोपित हो गया था। इन सभी ने विधिवत फार्म भरकर जमा किए थे, फिर भी उनके आवेदनों को निरस्त कर दिया गया और उन्हें नोटिस के माध्यम से सूचित किया गया। इस फैसले के बाद भाजपा नेताओं और पार्षदों ने इसे मतदाताओं के साथ अन्याय बताते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधीश से आवेदन स्वीकार कर नाम जोड़ने का अनुरोध किया। कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने आश्वासन दिया कि शासन स्तर पर मार्गदर्शन लेकर इस मामले में गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा। पूर्व सभापति दिनेश देवांगन ने कहा, "मतदान देना स्थानीय नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसे किसी से छीना नहीं जा सकता। यदि नागरिकों ने नियमानुसार समय पर आवेदन किया है, तो उस पर आयोग को गंभीरता से विचार कर नाम जोड़ना चाहिए। पूर्व में भी चुनाव प्रक्रिया के दौरान छूटे नामों को जोड़ा गया है, लेकिन इस बार नए नाम जोड़ने के स्पष्ट आदेशों के बावजूद आवेदन निरस्त करना समझ से परे है।" उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को सरकार के जिम्मेदार मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संज्ञान में लाया गया है ताकि किसी भी नागरिक को उनके मताधिकार से वंचित न किया जाए।
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