7 अक्टूबर 2026 |
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50 किलो से अधिक गीला कचरा उत्पन्न करने वाले होटलों के लिए अनिवार्य हुआ कम्पोस्ट पिट निर्माण"

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OM Darpan

Mar 26, 2025 04:31 pm 281 views
50 किलो से अधिक गीला कचरा उत्पन्न करने वाले होटलों के लिए अनिवार्य हुआ कम्पोस्ट पिट निर्माण"

भिलाईनगर (रवि कुमार भास्कर)। 

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स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत शासन ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार सभी होटल व्यवसायिकों को, जहां 50 किलो से अधिक गीला कचरा उत्पन्न होता है, अपने होटल परिसर में कम्पोस्ट पिट का निर्माण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य होटल से निकलने वाले अनउपयोगी खाद्य पदार्थों को कम्पोस्ट पिट के माध्यम से खाद में बदलना है।

स्वच्छ भारत अभियान की इस नई गाइडलाइन के तहत, होटल व्यवसायी कम्पोस्ट पिट का उपयोग करके अपनी उत्पादन प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल बना सकते हैं। इसके लिए बाजार में कुछ व्यवस्थित मशीने उपलब्ध हैं, लेकिन यदि मशीन का उपयोग न करना हो तो साधारण तरीके से दो बाई दो का गड्ढा खोद कर उसमें गुड़, मिट्टी, गोबर और केंचुए का छोटा सा अवशेष डालकर रासायनिक क्रिया शुरू कर सकते हैं, जो खाद में तब्दील हो जाता है। बीच-बीच में पानी डालते रहना पड़ता है। इस खाद का उपयोग होटल व्यवसायी अपने बागवानी, गमले और पेड़-पौधों में कर सकते हैं।

इसके अलावा, होटल व्यवसायियों को अपनी होटल में रजिस्टर मेंटेन करना होगा, जिसमें यह दर्ज करना होगा कि उनके यहां से कितना किलो गीला कचरा निकला और कितना किलो खाद बनाया गया। सूखा कचरा नगर निगम के सफाई वाहन में जमा करना अनिवार्य होगा। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान होटल की सफाई व्यवस्था पर भी रैकिंग निर्धारित की जाएगी।

आज, निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय, जोन आयुक्त अजय सिंह राजपूत, और स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली ने निगम क्षेत्र के होटलों में किये जा रहे कम्पोस्ट पिट का निरीक्षण किया। इसके साथ ही सब्जी मंडी, पार्क, सार्वजनिक शौचालय और बाजारों की सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निगम के अधिकारियों नेहरू नगर ईस्ट पिंग गार्डन के समीप एम मोगे और राजेश सूद के घर गए, जहां पर उनके बागवानी में किए जा रहे कम्पोस्ट पिट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निगम आयुक्त को बताया कि उनके यहां किसी भी पौधे में रसायनिक खाद का उपयोग नहीं होता और उनके घर के फूलों में भी अच्छी महक आती है। उन्होंने कहा कि सबको इस प्राकृतिक विधि का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि इससे बदबू भी नहीं होती और यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।

इस निरीक्षण में जोन सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अंकित सक्सेना, जनसम्पर्क अधिकारी अजय शुक्ला, जोन स्वास्थ्य निरीक्षक कमलेश द्विवेदी, पीआईयू सुभम पाटनी, और अभिनव ठोकने भी उपस्थित थे।

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