13 सितम्बर 2026 |
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फिकल स्लज प्रबंधन में दुर्ग अव्वल: पथरिया एफएसटीपी ने पकड़ी रफ्तार

OM Darpan

Dec 05, 2025 06:12 am 176 views
फिकल स्लज प्रबंधन में दुर्ग अव्वल: पथरिया एफएसटीपी ने पकड़ी रफ्तार
  • डी-स्लजिंग वाहन मिलने से बदली तस्वीर

  • सेप्टिक टैंकों की सफाई हुई आसान, खेती में होगा उपचारित पानी और खाद का उपयोग

  • कलेक्टर की पहल से दूर हुई बाधाएं

दुर्ग/धमधा (रोहितास सिंह भुवाल)।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत फिकल स्लज (मानव मल-अपशिष्ट) प्रबंधन में दुर्ग जिला तेजी से अग्रणी बन रहा है। जिले के धमधा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत पथरिया सह. में स्थापित फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) अब पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहा है। डी-स्लजिंग वाहन की उपलब्धता और प्रशासनिक सख्ती के बाद यहां सेप्टिक टैंकों की सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन का काम तेज हो गया है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

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ODF के बाद दूसरी बड़ी चुनौती

ग्राम पंचायत पथरिया सह. को वर्ष 2019 में ही खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित कर दिया गया था। यहां ग्रामीण क्षेत्रों में बने लगभग 60 प्रतिशत शौचालय सेप्टिक टैंक आधारित थे। इनके भरने पर सुरक्षित निपटान एक बड़ी समस्या थी, जिससे दोबारा खुले में शौच की स्थिति बनने का खतरा था। इसी चुनौती से निपटने के लिए पंचायत में कम लागत वाला 4 KLD क्षमता का एफएसटीपी स्थापित किया गया, जिसका निर्माण 30 मार्च 2022 को पूरा हुआ था।

वाहन और सुरक्षा की कमी से जूझ रहा था प्लांट

प्लांट बनने के बाद भी इसका संचालन सुचारू नहीं हो पा रहा था। मुख्य वजह डी-स्लजिंग वाहन का न होना था। इसके अलावा, प्लांट परिसर में बाउंड्री वॉल (अहाता) न होने से असामाजिक तत्व वहां तोड़-फोड़ कर रहे थे। कलेक्टर अभिजीत सिंह के संज्ञान में मामला आने पर उन्होंने तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

फाउंडेशन ने दिया वाहन, पंचायत ने कराया घेराव

प्रशासनिक मार्गदर्शन के बाद ग्राम पंचायत और जामुल द्वारा प्लांट परिसर में तार-घेरा कराया गया। वहीं, आईसीआईसीआई बैंक फाउंडेशन के सहयोग से राज्य कार्यालय द्वारा सितंबर 2024 में डी-स्लजिंग वाहन उपलब्ध कराया गया। वाहन मिलने के बाद से यहां काम ने रफ्तार पकड़ ली है। संचालन के लिए ड्राइवर और सहायक की नियुक्ति कर दी गई है।

दीवारों पर लिखे नंबर, एक कॉल पर सफाई

जागरूकता फैलाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में मोबाइल नंबरों का दीवार लेखन कराया गया है। अब ग्रामीण इन नंबरों पर संपर्क कर आसानी से सेप्टिक टैंक खाली करवा रहे हैं। नियमित डी-स्लजिंग होने से ग्रामीणों में संतोष है।

वैज्ञानिक तरीके से बन रही खाद

जिला पंचायत सीईओ बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि एफएसटीपी एक वैज्ञानिक संयंत्र है। यह सेप्टिक टैंकों और गड्ढा शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट का सुरक्षित उपचार करता है। इस प्रक्रिया में ठोस और तरल कचरे को अलग कर उपयोगी संसाधनों में बदला जाता है। इससे तैयार जैविक खाद और उपचारित पानी का उपयोग अब कृषि और बागवानी में किया जा सकेगा।

पर्यावरण और सेहत दोनों को लाभ

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस प्लांट के सुचारू संचालन से नदियों, नालों और भूजल स्रोतों को दूषित होने से बचाया जा सकेगा। यह अनुपचारित मल से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम में भी सहायक साबित होगा।

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