UGC के नए नियमों से 'प्राकृतिक न्याय' का गला घोंटने की तैयारी? भड़का राजपूत समाज; छत्तीसगढ़ में कलेक्टरेट घेरने का ऐलान!
OM Darpan
दुर्ग/रायपुर।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत समानता और भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लागू किए गए नए नियमों (13 जनवरी 2026) के खिलाफ राजपूत समाज ने मोर्चा खोल दिया है। राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ (रहटादाह, पंजीयन क्रमांक 1282) ने इन नियमों को 'अव्यावहारिक' और 'एकपक्षीय' करार देते हुए इन्हें तत्काल निरस्त करने या सुधार करने की मांग की है।
महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर बजरंग बैस एवं केंद्रीय कार्यकारिणी के निर्णय अनुसार, कल 29 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ की सभी 37 उप-समितियों द्वारा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों, ब्लॉकों और तहसीलों में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसी कड़ी में शाम 4:00 बजे जिला दुर्ग के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें दुर्ग उत्तर उप-समिति के 100 से अधिक पदाधिकारी और सदस्य शामिल होंगे।
क्या है आपत्ति?
राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ के दुर्ग उत्तर उप-समिति सचिव ने बताया कि 13 जनवरी 2026 से प्रभावी हुए नियम सामान्य संवर्ग के छात्रों और प्राध्यापकों के हितों के प्रतिकूल हैं। समाज का आरोप है कि इन नियमों के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों पर सीधे कार्रवाई का प्रावधान है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
आरोप है कि नए नियमों में आरोपी पक्ष को अपनी सफाई पेश करने या पक्ष रखने का कोई अवसर प्रदान नहीं किया गया है। इससे सामान्य वर्ग के विरुद्ध झूठे आरोप लगाकर उन्हें फंसाए जाने की आशंका बढ़ गई है। महासभा ने स्पष्ट किया है कि वे समानता के अधिकार के पक्षधर हैं, लेकिन नियम ऐसे होने चाहिए जिससे दोषी सिद्ध होने पर ही कार्रवाई हो और गलत आरोप लगाने वालों के विरुद्ध भी दंडात्मक प्रावधान हों।
इस निर्णय को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ के राजपूत समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। समाज की मांग है कि उक्त आदेश पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसमें आवश्यक संशोधन कर सभी वर्गों के लिए न्याय के समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
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