नई दिल्ली।
दोहा फोरम में अपने बयान में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के आगामी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 100 प्रतिशत टैरिफ वाली धमकी का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य अमेरिकी डॉलर को कमजोर करना नहीं है, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत डी-डॉलरीकरण के पक्ष में नहीं है और पहले भी इस बात को साफ किया है।
विदेश मंत्री ने ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीतने को लेकर कहा कि यह क्वाड संगठन के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उनके अनुसार, ट्रंप की वापसी से क्वाड संगठन में और मजबूती आएगी और क्षेत्रीय सहयोग को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
अपने बयान में उन्होंने ट्रंप प्रशासन के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को बेहतर बताते हुए कहा कि क्वाड को बढ़ावा देने में ट्रंप का योगदान सराहनीय रहा। हालांकि, व्यापार संबंधित कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हुई थी। बावजूद इसके, जयशंकर ने यह नहीं भुलाया कि कई ऐसे मुद्दे भी थे जिनमें ट्रंप ने भारत का समर्थन किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत रिश्ते के बारे में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच की केमिस्ट्री दोनों देशों के संबंधों को और मजबूती प्रदान करती है। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ा है और दोनों देशों के पास आपसी सहयोग के लिए और अधिक मुद्दे हैं।
ब्रिक्स करेंसी पर टिप्पणी करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत के पास अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिक्स करेंसी को लॉन्च करने का कोई कार्यक्रम या प्रस्ताव नहीं है।
जयशंकर ने इस बात को स्पष्ट किया कि अमेरिका और भारत के व्यापारिक संबंधों में किसी प्रकार की कोई विघटनकारी स्थिति नहीं है और दोनों देशों के बीच के सहयोग में लगातार वृद्धि हो रही है।










