दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
गया नगर में नवरात्रि के पावन अवसर पर जगह-जगह गरबा और डांडिया की धूम मची रही। बच्चों से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों तक सभी देवी भक्ति में लीन नजर आए। इसी क्रम में गया नगर महिला रास गरबा समिति द्वारा मानस मंदिर मैदान में 5 दिवसीय डांडिया कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 5 साल से लेकर 18 वर्ष तक की बालिकाओं ने गरबा कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और माता रानी को नृत्य के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।
अष्टमी के समापन दिवस पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को नगर निगम के पूर्व सभापति दिनेश देवांगन के हाथों पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी प्रतिभागियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आयोजन समिति में गया नगर गरबा महिला समिति की अध्यक्ष प्रियंका जैन, सचिव सरस्वती सोनी, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी साहू, नूपुर श्रीवास्तव, सरोज निर्मलकर, मनोरमा सिंह, और कामिनी गुप्ता प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
कार्यक्रम में भाजपा मंडल महामंत्री रीता मेश्राम, महिला मोर्चा अध्यक्ष शीतल जांगिड़, दिलेश्वरी तुरकर, सोनिया रेवतकर, मोती राम सिन्हा और अजीत जैन उपस्थित थे।
पुरस्कार वितरण में अग्रणी रही जया साहू
गरबा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली प्रतिभागियों के लिए पुरुष्कार की विशेष व्यवस्था की गई थी। योगेश जैन द्वारा प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए, जिनमें जया साहू को प्रथम पुरस्कार के रूप में बजाज का मिक्सर ग्राइंडर प्रदान किया गया। अनन्या सिंह को द्वितीय पुरस्कार में क्रॉकरी सेट और एकता सोनकर को तृतीय पुरस्कार के रूप में हैवेल्स का आयरन दिया गया।
इसके अलावा, बेस्ट जोड़ी का पुरस्कार प्रमित ताम्रकार और नमन ताम्रकार को दिया गया, जबकि बेस्ट मेकअप के लिए युक्तिका देवांगन को मेकअप किट से नवाजा गया। बेस्ट किड डांसर का पुरस्कार नव्या को दिया गया। सभी बच्चों को महिला समिति की ओर से सांत्वना पुरस्कार स्वरूप प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिनेश देवांगन ने गरबा का महत्व बताते हुए कहा कि “पृथ्वी के गोलाकार स्वरूप को देवी का रूप माना गया है, और लोग गरबा के माध्यम से गोलाकार नृत्य करते हुए माता रानी की स्तुति और श्रद्धा प्रकट करते हैं। इसीलिए नवरात्रि में डांडिया का आयोजन प्रमुखता से किया जाता है।”
उन्होंने गया नगर महिला मंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा, “इस प्रकार के आयोजनों से धर्म और अध्यात्म के प्रति लोगों में चेतना जागृत होती है, और महिलाओं का इस दिशा में योगदान सराहनीय है।”










