



नई दिल्ली।
अमेरिकी प्रोसिक्यूटर्स ने अडानी ग्रुप पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं, जिससे गौतम अडानी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भारतीय-अमेरिकी अटॉर्नी रवि बत्रा ने बताया कि गौतम अडानी और सात अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो सकता है और उनके प्रत्यर्पण के प्रयास भी किए जा सकते हैं। भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि है, जिसके आधार पर अमेरिकी अधिकारियों के पास अडानी को भारत से लाने का अधिकार है।
गिरफ्तारी वारंट की संभावना अमेरिकी अधिकारियों के पास गौतम अडानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार है। इसके अलावा, वे भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है, लेकिन भारत में विपक्षी दल लगातार गौतम अडानी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। अमेरिकी कोर्ट में रिश्वतखोरी के आरोप तय होने के बाद अब अडानी ग्रुप भारत में भी दबाव में है। इस स्थिति में सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) भी अडानी ग्रुप की जांच कर सकता है।
सेबी की संभावित जांच अडानी ग्रुप पर जानकारी छिपाने का आरोप भी लगा है। 15 मार्च को अडानी ग्रुप ने कहा था कि गौतम अडानी के खिलाफ किसी भी अमेरिकी जांच के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। लेकिन 19 मार्च को शेयर बाजार में दाखिल एक फाइलिंग में अडानी ग्रीन ने बताया कि उन्हें अमेरिकी भ्रष्टाचार रोधी कानूनों की संभावित जांच की जानकारी थी। आरोपों के अनुसार, मार्च में अडानी ग्रुप का इनकार झूठा था, जिसका मकसद कथित धोखाधड़ी योजना को आगे बढ़ाना था।
व्हाइट हाउस का बयान गौतम अडानी के भतीजे सागर अडानी को पहले ही अमेरिकी कोर्ट से समन और तलाशी वारंट मिला था। अब सेबी अडानी ग्रुप पर लगे आरोपों की जांच करेगी। जांच अगले दो हफ्तों तक चलने की संभावना है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने बयान जारी किया है कि अमेरिकी प्रशासन को अडानी के खिलाफ लगे आरोपों की पूरी जानकारी है। व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि गौतम अडानी पर लगे इन आरोपों से भारत-अमेरिका के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।





