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बुजुर्गों की अधूरी ख्वाहिशों को मिला आसरा: मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का शुभारंभ

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रायपुर।

 आज का दिन छत्तीसगढ़ के बुजुर्गों के लिए एक सुनहरे सपने के सच होने जैसा है। रायपुर रेलवे स्टेशन पर उस पल का गवाह बना जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरी झंडी दिखाकर पहली विशेष तीर्थ यात्रा ट्रेन को तिरुपति, मदुरै और रामेश्वरम के लिए रवाना किया। इस ट्रेन में सवार 780 बुजुर्ग श्रद्धालुओं की आंखों में चमक और चेहरों पर मुस्कान थी, जो वर्षों से तीर्थ यात्रा की चाहत को दिल में संजोए हुए थे। यह यात्रा उनके लिए केवल धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि सम्मान और अपनत्व का एक भाव भी लेकर आई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्रेन रवाना करने से पहले बुजुर्गों से दिल को छू लेने वाली बातचीत की। उन्होंने कहा, “आपके चेहरों की यह खुशी ही मेरा सबसे बड़ा संतोष है। रामेश्वरम में आप पवित्र रामसेतु और ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे, मदुरै में मीनाक्षी मंदिर की भव्यता देखेंगे और तिरुपति में बालाजी का आशीर्वाद लेंगे। यह दक्षिण भारत के तीर्थों का एक अनमोल अवसर है।” उनकी यह बातें बुजुर्गों के मन में एक नई उम्मीद और उत्साह भर गईं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बताया कि यह योजना कोई साधारण पहल नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग की भावनाओं का सम्मान है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाया। उन्होंने कहा, “हमारे बुजुर्गों की तीर्थ यात्रा की इच्छा अक्सर अधूरी रह जाती थी। आज हमें संतोष है कि हम इसे पूरा कर पा रहे हैं।” योजना में विधवा और परित्यक्त महिलाओं को भी शामिल किया गया है, ताकि वे भी इस सौभाग्य की भागीदार बन सकें।

मुख्यमंत्री ने यह भी साझा किया कि प्रदेश में पहले से चल रही रामलला (अयोध्या दर्शन) योजना के तहत 22 हजार से अधिक श्रद्धालु भगवान राम के दर्शन कर चुके हैं। साथ ही, प्रयागराज में 144 साल बाद हुए महाकुंभ में छत्तीसगढ़ के लाखों तीर्थयात्रियों की सेवा का मौका मिला। इसके लिए वहां साढ़े चार एकड़ में छत्तीसगढ़ पवैलियन बनाया गया था, जो श्रद्धालुओं के लिए सुविधा का ठिकाना बना।

इस योजना को निरंतरता देने के लिए सरकार ने 15 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसमें उज्जैन, पुरी, द्वारिका, वैष्णो देवी, मथुरा और वृंदावन जैसे तीर्थ स्थल शामिल हैं, जहां श्रद्धालु मुफ्त यात्रा कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार युवाओं, किसानों, महिलाओं और आदिवासी समुदाय सहित हर वर्ग के लिए समर्पित है। यह योजना उसी संकल्प का हिस्सा है।”

समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगम का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “यह केवल यात्रा नहीं, हमारी सनातन परंपराओं और आस्था का सम्मान है।” उनके मुताबिक, योजना में ट्रेन यात्रा से लेकर ठहरने, भोजन, दर्शन, सुरक्षा और चिकित्सा तक की व्यवस्था है। स्पेशल ट्रेन में टूर एस्कॉर्ट, पुलिस बल और चिकित्सकों की टीम भी साथ है, ताकि श्रद्धालुओं को हर कदम पर सहूलियत मिले।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि यह योजना पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में 4 दिसंबर 2012 को शुरू हुई थी। तब 15 जनवरी 2013 से 10 जून 2019 तक 272 यात्राओं में 2,46,983 श्रद्धालुओं ने लाभ उठाया था। लेकिन पिछले पांच सालों में यह बंद रही। अब इसे फिर से शुरू कर सरकार ने बुजुर्गों की आस्था को नया बल दिया है।

इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक अनुज शर्मा, समाज कल्याण आयुक्त भुवनेश यादव, संचालक रोक्तिमा यादव, रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, रायपुर डीआरएम दयानंद और समाज कल्याण व रेलवे विभाग के अधिकारी-कर्मचारी। बड़ी संख्या में नागरिक भी इस भावुक क्षण का हिस्सा बने।

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