रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज पांचवा और अंतिम दिन था। सत्र के दौरान मलेरिया और डायरिया के प्रकोप को लेकर गरमागरम चर्चा हुई। बीजेपी नेताओं ने पूर्व सरकार पर आरोप लगाए कि उनके कार्यकाल के दौरान दवाओं और कीटाणु नियंत्रण की आपूर्ति में कमी रही, जिससे प्रदेश के कई जिलों में यह समस्या बढ़ी।
बीजेपी विधायक ने लगाया पूर्व सरकार पर आरोप
बीजेपी विधायक मोतीलाल साहू ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से विधानसभा में मलेरिया और डायरिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में मलेरिया और डायरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि पूर्व सरकार ने भुगतान रोक दिया था, जिसके कारण दवाओं और कीटों की आपूर्ति नहीं हो पाई।
सरकार का जवाब: जांच और नियंत्रण की पहल
मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने बताया कि सभी जिलों में लगातार जांच की जा रही है और बस्तर संभाग में मलेरिया नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दो बच्चों की मृत्यु का कारण देर से अस्पताल पहुंचना था। जायसवाल ने बताया कि मच्छरदानी का वितरण और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
उच्च अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग
भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने सुझाव दिया कि जिले के उच्च अधिकारियों से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों को निर्देशित किया जाए ताकि मलेरिया पीड़ितों की जानकारी सही समय पर स्वास्थ्य विभाग तक पहुंच सके। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 6 विभागों के समन्वय से यह काम किया जा रहा है और सभी कलेक्टर, पटवारी, मितानिन और आंगनबाड़ी को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी केस आए तो ब्लॉक मुख्यालय को सूचना दी जाए।
कोटा में मलेरिया से मौतों पर चर्चा
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में दो लोगों की मृत्यु मलेरिया से हुई है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया था कि बेलगहना के आस-पास कैंप लगवाया जाए, लेकिन अब तक यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने एंबुलेंस सेवा की कमी का भी जिक्र किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रभावित इलाके में टीम गई थी और कोटा के आसपास 385 मरीज भर्ती थे, लेकिन मलेरिया से किसी की मृत्यु नहीं हुई है।









