अंबिकापुर (पंकज शुक्ला)।
शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन नवमीं तिथि पर शहर में भव्य शोभायात्रा निकालकर जवारा विसर्जन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए, जिनमें महिलाएं और पुरुष भक्त शामिल थे। यह धार्मिक यात्रा मायापुर स्थित देवी धाम से प्रारंभ होकर मां महामाया मंदिर तक पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ जवारे का विसर्जन किया गया।
शोभायात्रा के दौरान भक्तों की आस्था चरम पर दिखी। देवी मां को प्रसन्न करने के लिए कई श्रद्धालुओं ने अपने जीभ और गाल में लोहे का त्रिशूल आरपार किया। इस अनूठी आस्था का प्रदर्शन भक्तों द्वारा नाचते-झूमते देखा गया। भक्तों की आस्था और भक्ति ने शोभायात्रा को अद्वितीय बना दिया।
मायापुर चांदनी चौक स्थित देवी धाम से जवारा विसर्जन के लिए यह शोभायात्रा दोपहर को निकाली गई। शोभायात्रा मायापुर से प्रारंभ होकर गुरुनानक चौक, महामाया चौक, समलाया मंदिर होते हुए मां महामाया मंदिर पहुंची। देवी धाम से निकली इस यात्रा में पुरुष और महिला श्रद्धालुओं ने जीभ में बाना भेदकर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।
100 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा
मायापुर स्थित देवी धाम पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। धाम के पुजारी रामानंद सिंह इस परंपरा का विधिपूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। धाम में जवारों की स्थापना और विसर्जन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस धाम में देवी का वास होता है, और यहां के श्रद्धालु अपनी भक्ति को प्रदर्शित करने के लिए अपने जीभ में लोहे के बने बाना को आरपार कर देवी मां को प्रसन्न करते हैं।
यह धार्मिक आयोजन शहर में एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक घटना के रूप में देखा जाता है, जहां भक्तगण बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मां के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करते हैं।










