सुकमा।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शनिवार को सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। यहां कुल 23 इनामी नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों पर कुल 1.18 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। एक दिन पहले ही नारायणपुर जिले में 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद सुकमा में इन इनामी माओवादियों का सरेंडर सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है।
आत्मसमर्पण करने वाले इनामी नक्सली:
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिन पर भारी इनाम घोषित था। इनमें 8 लाख रुपये के इनामी नक्सली प्रमुख हैं:
- लोकेश उर्फ पोड़ियाम भीमा – डीव्हीसीएम स्तर का नक्सली नेता
- रमेश उर्फ कलमू केसा – पीपीसीएम रैंक के वरिष्ठ सदस्य
- कवासी मासा – पीपीसीएम स्तर का माओवादी
- प्रवीण उर्फ संजीव उर्फ मड़कम हुंगा – पीपीसीएम के रूप में सक्रिय
- नुप्पो गंगी – पीपीसीएम रैंक का माओवादी
- पुनेम देवे – पीपीसीएम स्तर का नक्सली
- परस्की पांडे – पीएलजीए पार्टी का सदस्य
- माड़वी जोगा – पीएलजीए पार्टी सदस्य
- नुप्पो लच्छु उर्फ लक्ष्मण – पीएलजीए बटालियन मुख्यालय में एसजेडसीएम सन्नू दादा का गार्ड
- पोड़ियाम सुखराम – पीएलजीए बटालियन क्रमांक 01 की कंपनी क्रमांक 03 के प्लाटून क्रमांक 3, सेक्शन ‘ए’ का सदस्य
- दूधी भीमा – प्लाटून क्रमांक 04 का डिप्टी कमांडर व पीपीसीएम रैंक का माओवादी
इसके अतिरिक्त 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली (एसीएम रैंक) मुचाकी रनौती उर्फ हिड़मे, कलमू दुला, दूधी मंगली व सिद्धार्थ उर्फ माड़वी इंदा ने भी हथियार डाले। 3 लाख रुपये के इनामी पार्टी सदस्य हेमला रामा तथा 1 लाख रुपये के इनामी पार्टी सदस्य सोड़ी हिड़मे, कवासी जोगा, रूपा उर्फ भीमे, गगन उर्फ करटम दुड़वा, कवासी हुंगी, कारम भीमा व मड़कम नंदे भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में कुख्यात डीवीसीएम लोकेश भी शामिल है, जो 2012 में कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण में भी शामिल था।
सुरक्षाबलों की संयुक्त कार्रवाई का परिणाम:
यह सफलता सुकमा पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त अभियान का नतीजा है। आत्मसमर्पण पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण व सीआरपीएफ डीआईजी आनंद सिंह की मौजूदगी में हुआ। इस अभियान में सीआरपीएफ की 2वीं, 223वीं, 227वीं, 165वीं बटालियन एवं कोबरा की 204वीं व 208वीं बटालियन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आईजी बस्तर ने जताई उम्मीद:
बस्तर के आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने इस अवसर पर कहा कि आज का आत्मसमर्पण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि माओवादी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापस आना चाहते हैं। उन्होंने इसे बस्तर में शांति व पुनर्वास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया।
उन्होंने आगे कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी बीते वर्षों में कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहे थे, लेकिन अब वे अहिंसा व समाज में दोबारा जुड़ने का मार्ग चुन रहे हैं। उन्होंने सभी सक्रिय नक्सलियों से आत्मचिंतन करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा पुनर्वास व सम्मानजनक जीवन के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और आत्मसमर्पण व पुनर्वास के दरवाजे हमेशा खुले हैं।









