14 सितम्बर 2026 |
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100 क्विंटल धान और जीरो परेशानी: ऑफलाइन टोकन सिस्टम में मानमति ने कर दिखाया कमाल, उपार्जन केंद्र की व्यवस्था देख हर कोई हैरान

OM Darpan

Jan 28, 2026 06:27 am 291 views
100 क्विंटल धान और जीरो परेशानी: ऑफलाइन टोकन सिस्टम में मानमति ने कर दिखाया कमाल, उपार्जन केंद्र की व्यवस्था देख हर कोई हैरान

जमीनी सफलता: मनेन्द्रगढ़ की मानमति बनीं मिसाल, कोड़ा केंद्र की सुव्यवस्थित व्यवस्था में 100 क्विंटल धान का हुआ पारदर्शी विक्रय

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत संचालित धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए सुविधा, भरोसे और पारदर्शिता का नया केंद्र बनकर उभरी है। जिले के ग्राम कोचका की महिला किसान मानमति की कहानी इस सरकारी व्यवस्था की जमीनी सफलता का प्रमाण है। मानमति ने कोड़ा उपार्जन केंद्र में 100.00 क्विंटल धान का सफल विक्रय कर यह साबित कर दिया कि सही प्रबंधन हो तो ऑफलाइन टोकन प्रक्रिया भी पूरी तरह सुव्यवस्थित और प्रभावी हो सकती है।

बिना भीड़ और अव्यवस्था के संपन्न हुई प्रक्रिया

धान विक्रय के लिए किसान मानमति को ऑफलाइन खरीदी टोकन जारी किया गया था। निर्धारित तिथि पर जब वे उपार्जन केंद्र पहुंचीं, तो उन्हें पूर्व वर्षों की तरह न तो भीड़ का सामना करना पड़ा और न ही किसी अव्यवस्था का। गुणवत्ता जांच से लेकर डिजिटल तौल, रसीद जारी होने और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरी की गई। मानमति के अनुसार, पहले धान बिक्री के दौरान काफी असमंजस और विलंब होता था, लेकिन इस वर्ष की व्यवस्था ने बड़ी राहत दी है।

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₹3100 समर्थन मूल्य से संवरेगा भविष्य

मानमति को उनकी उपज के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि यह सम्मानजनक राशि उनके कृषि कार्यों और पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ी मददगार साबित होगी। केंद्र पर उपलब्ध बारदाना, डिजिटल तौल मशीनें, पेयजल और बैठने की उत्तम व्यवस्था ने किसानों के अनुभव को सुखद बनाया है।

महिला किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

कोड़ा उपार्जन केंद्र पर मानमति का यह आत्मविश्वास अन्य महिला किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं निर्भीक होकर केंद्रों तक पहुंच रही हैं और सरकारी व्यवस्था का लाभ उठा रही हैं। इससे न केवल कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।

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