मुंबई।
उत्तर पूर्व दिल्ली के सांसद और भोजपुरी फिल्मों के मेगा स्टार मनोज तिवारी ने हाल ही में 110 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा रिकॉर्ड समय में पूरी की। यात्रा समाप्त करने के बाद, आज नई दिल्ली में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें बाबा वैद्यनाथ धाम का प्रसाद पेंडा भेंट किया। तिवारी ने यह यात्रा बिहार के अजगैबी नाथ धाम, सुल्तानगंज से जल लेकर बाबा वैद्यनाथ धाम तक पैदल पूरी की। उन्होंने यह दूरी मात्र 55 घंटे में तय की, जबकि सामान्यतः इसमें 72 घंटे का समय लगता है।
रिकॉर्ड कांवड़ यात्रा के बाद PM से भेंट
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने 31 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त को समाप्त हुई अपनी इस कांवड़ यात्रा के दौरान पैर में छाले पड़ने के बावजूद इसे पूरा किया। बाबा वैद्यनाथ धाम से दिल्ली लौटने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा। प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान उनके साथ उनकी धर्मपत्नी सुरभि तिवारी भी मौजूद थीं। मनोज तिवारी पहले ऐसे सेलिब्रिटी और सांसद हैं जिन्होंने इतनी लंबी और कठिन पैदल कांवड़ यात्रा की और इसके तुरंत बाद संसद के मानसून सत्र में भी भाग लिया। उन्होंने जल चढ़ाने के दूसरे ही दिन संसद की कार्यवाही में हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री ने ‘हर हर महादेव’ से किया स्वागत
मुलाकात के बाद, सांसद मनोज तिवारी ने फेसबुक और एक्स पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि उन्होंने नंगे पांव चलने वाले सभी कांवड़ियों की ओर से विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता, मानवता व शांति के प्रबल पक्षधर, भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को बाबा वैद्यनाथ धाम का प्रसाद पेंडा भेंट किया। तिवारी ने बताया कि बाबा वैद्यनाथ धाम का प्रसाद पाते ही प्रधानमंत्री ने ‘हर हर महादेव’ उच्चारित किया और अत्यंत प्रसन्न दिखाई दिए। प्रधानमंत्री ने मनोज तिवारी के साथ-साथ बाबा धाम की कांवड़ यात्रा और कांवड़ियों का भी हालचाल जाना। इस मुलाकात के दौरान तिवारी ने अपनी 4.5 वर्षीय बेटी सान्विका की बनाई एक पेंटिंग भी प्रधानमंत्री को भेंट की।
सांसद तिवारी का अनूठा समर्पण
मनोज तिवारी की यह यात्रा उनके समर्पण और जनसामान्य से जुड़ाव को दर्शाती है। एक सांसद और सेलिब्रिटी होने के बावजूद उन्होंने यह कठिन आध्यात्मिक यात्रा पूरी की, जो आमतौर पर आम भक्तों द्वारा की जाती है। संसद सत्र के बीच में इस यात्रा को पूरा कर तुरंत संसद में वापसी करना उनके लिए एक अनूठी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसने राजनीतिक और आध्यात्मिक दोनों गलियारों में ध्यान आकर्षित किया है।









