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मनोरा और दुलदुला विकासखंड के स्व-सहायता समूहों ने पेश की मिसाल, सरकारी तालाबों के पट्टे से बदली किस्मत

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✍️ डिजिटल डेस्क

जशपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। शासन की योजनाओं और विभागीय सहयोग के चलते जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब मछली पालन जैसे लाभकारी व्यवसाय को अपनाकर अपनी आय में भारी इजाफा कर रही हैं। मनोरा और दुलदुला विकासखंड के महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों को अपनी प्रगति का आधार बनाकर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है।

भभरी गांव में कमल समूह का कमाल: सालाना 6 लाख की हुई आय

जशपुर के मनोरा विकासखंड स्थित ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले 3 वर्षों से मछली पालन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। यह समूह ग्राम पंचायत के 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में 10 वर्षीय पट्टे के माध्यम से मछली पालन कर रहा है। विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन और सामूहिक मेहनत के बल पर समूह प्रतिवर्ष लगभग 3 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहा है। इससे महिलाओं को करीब 6 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब ये महिलाएं बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे खर्चों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं।

सिमड़ा में दीप समूह ने लिखी अपनी सफलता की कहानी

दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी सशक्तिकरण की राह पर आगे बढ़ रही हैं। यह समूह पिछले 3 वर्षों से 0.800 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में मछली पालन कर रहा है। संगठित प्रयासों के चलते समूह प्रतिवर्ष लगभग 3.30 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहा है, जिससे उन्हें लगभग 6.93 लाख रुपये की वार्षिक आय हो रही है। इस वृद्धि ने समूह की महिलाओं को पहले के मुकाबले अधिक आर्थिक मजबूती प्रदान की है।

शासकीय योजनाओं से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय तालाबों का पट्टा उपलब्ध कराने और तकनीकी प्रशिक्षण देने की शासन की पहल रंग ला रही है। मछली पालन से होने वाली नियमित आय ने महिलाओं को परिवार के आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका दिया है। कमल और दीप महिला स्व-सहायता समूह की सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। यह बदलाव साबित करता है कि शासन की योजनाओं का सही लाभ और सामूहिक प्रयास ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

 

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