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सीएम साय बोले- विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे गांव
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ अब शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। रायपुर में आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में उन्होंने साफ किया कि प्रदेश अब नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नई इबारत लिख रहा है।
साय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। इसके तहत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में लोहा, बॉक्साइट, लिथियम और सोने जैसे खनिज संसाधनों के साथ-साथ टिन का भी प्रचुर भंडार है, जिसका उपयोग विकास के लिए किया जा रहा है।
70 सुरक्षा कैंप बनेंगे सेवा डेरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के साथ विकास को प्राथमिकता दी गई है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को अब ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है, जहां होम-स्टे के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है।
8 लाख करोड़ के निवेश का प्रस्ताव
नई औद्योगिक नीति के माध्यम से प्रदेश में अब तक 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार ने प्रावधान किया है कि एक हजार युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज और 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी के लिए यूथ हॉस्टल की सुविधा भी दी जा रही है।
पंच से मुख्यमंत्री तक का सफर
अपनी जीवनयात्रा का जिक्र करते हुए साय ने बताया कि 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद उन्होंने किसान के रूप में जिम्मेदारियां संभालीं। गांव वालों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और फिर निर्विरोध सरपंच बने। 1990 में पहली बार विधायक बनने के बाद वे चार बार सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री रहे। उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना ही उनका मुख्य लक्ष्य है।









