दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
अभ्युदय संस्थान, अछोटी में 11 अक्टूबर 2025 को “चेतना विकास एवं मूल्य आधारित शिक्षा” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षकों से संवाद करते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में संस्कार, चेतना और सकारात्मक परिवर्तन का आधार है। उनके इस संबोधन ने कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों में नई ऊर्जा का संचार किया।
नई शिक्षा नीति और नैतिक मूल्यों पर जोर
मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा, जीवन मूल्यों और व्यवहारिक ज्ञान को विशेष महत्व देने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से पुरजोर आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना को प्राथमिकता दें, ताकि आने वाली पीढ़ी विकसित छत्तीसगढ़ और सशक्त भारत निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके। यह केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी कार्य है।
स्वच्छ समाज की आधारशिला: मजबूत शिक्षा व्यवस्था
कार्यशाला में विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों के साथ विचार-विमर्श के दौरान मंत्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छ समाज की नींव एक सशक्त शिक्षा व्यवस्था पर ही आधारित है। उन्होंने कहा, जब स्कूलों में संस्कार, अनुशासन और सेवा भाव का वातावरण विकसित होगा, तब राष्ट्र भी स्वच्छ और जागरूक बनेगा। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हर शिक्षक की भूमिका निर्णायक होती है।
कार्यशाला में विभिन्न स्कूलों से पहुंचे शिक्षकों ने वर्तमान शिक्षा परिस्थितियों को और बेहतर बनाने के लिए अपने-अपने अनुभव साझा किए। सभी ने मिलकर नई शिक्षा नीति में मूल्य आधारित शिक्षा को विद्यालयों में और प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया, जिससे विद्यार्थी सशक्त समाज और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सकें।
कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालक ऋतुराज रघुवंशी, योगेश शास्त्री, संकेत ठाकुर, अनीता शाह, पार्षद कुलेश्वर साहू एवं कांशीराम कोसरे सहित क्षेत्र के अनेक शिक्षकगण उपस्थित थे।










