2 अक्टूबर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

बुक्सा में बाघिन को छोड़कर बाघ पुनर्वास कार्यक्रम शुरू

शेयर करें

OM Darpan

Oct 02, 2026 09:04 pm 159 views
बुक्सा में बाघिन को छोड़कर बाघ पुनर्वास कार्यक्रम शुरू
बुक्सा बाघ अभयारण्य में बाघिन छोड़ते हुए बाघ पुनर्वास कार्यक्रम

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के बुक्सा बाघ अभयारण्य में बाघिन को छोड़कर 'बाघ पुनर्वास कार्यक्रम' की शुरुआत की गई। 'वन्यजीव सप्ताह 2026' के तहत शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में बाघों की आबादी को प्राकृतिक रूप से बहाल करना है। इस दौरान केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मौजूद रहे।

भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिदृश्य संरक्षण और प्रजातियों की सुरक्षा के प्रयासों से प्रेरित होकर बुक्सा में बाघों को फिर से बसाने का वादा पूरा हुआ है। उन्होंने इस सहयोग के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का धन्यवाद किया।

वाल्मीकि अभयारण्य से लाई गई बाघिन

इस चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत बाघिन को बिहार के वाल्मीकि बाघ अभयारण्य से लाया गया है। इसे पारिस्थितिक, पशुचिकित्सा और प्रबंधन मानकों के मूल्यांकन के बाद स्थापित प्रोटोकॉल के तहत जंगल में छोड़ा गया। अब टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैपिंग और फील्ड मॉनिटरिंग के जरिए इसकी गतिविधियों, सेहत और व्यवहार पर निगरानी रखी जाएगी।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

1983 में घोषित हुआ था बाघ अभयारण्य

उत्तर बंगाल का यह महत्वपूर्ण क्षेत्र 1983 में बाघ अभयारण्य घोषित किया गया था। यह भूटान और असम के जंगलों से जुड़ा है। बीते दशकों में आवास के क्षरण, भूमि उपयोग में बदलाव और शिकार की कमी से यहाँ बाघों की स्थायी आबादी नहीं रह गई थी।

2018 से जारी है रिकवरी प्रोजेक्ट

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के सहयोग से पश्चिम बंगाल सरकार 2018 से 'टाइगर ऑगमेंटेशन एंड रिकवरी प्रोजेक्ट' चला रही है। शिकार आधार बढ़ाने के लिए अब तक 800 से अधिक चीतल छोड़े गए हैं और 380 हेक्टेयर घास के मैदानों को पुनर्स्थापित किया गया है। कैमरा ट्रैप में 2021, 2023 और 2026 में बाघों की तस्वीरें दर्ज हुई थीं, जिनमें 2023 की तस्वीर का मिलान असम के मानस बाघ अभयारण्य के बाघ से हुआ था।

64 समितियों को किया शामिल

स्थानीय समुदायों की भागीदारी के लिए 64 पर्यावरण-विकास और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को शामिल किया गया है। योजना के तहत आने वाले समय में वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर अन्य चरणों में भी बाघ लाए जाएँगे।

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
261003031913674

विज्ञापन

Advertisement