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बाघों को बचाने के लिए आईबीसीए और एडीबी के बीच समझौता, 6 देशों के प्रतिनिधि जुटे

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OM Darpan

Sep 02, 2026 11:29 pm 553 views
बाघों को बचाने के लिए आईबीसीए और एडीबी के बीच समझौता, 6 देशों के प्रतिनिधि जुटे
  नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को 'बाघ बहुल क्षेत्र: आजीविका और आय सृजन के स्तंभ के रूप में संरक्षण, जैव अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिक पर्यटन' विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। कार्यशाला में बाघ परिदृश्यों को प्राकृतिक पूंजी के रूप में मान्यता देने और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें चर्चा की गई कि कैसे संरक्षण और इको-टूरिज्म स्थानीय आय सृजन और दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुरक्षा के प्रमुख चालक बन सकते हैं। मंच पर सचिव तन्मय कुमार, महानिदेशक सुशील कुमार अवस्थी और आईबीसीए के महानिदेशक एसपी यादव मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र में भूपेंद्र यादव ने कहा कि बाघों का अस्तित्व जंगलों, नदियों और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। उन्होंने प्रजाति-केंद्रित संरक्षण के बजाय एकीकृत परिदृश्य प्रबंधन की आवश्यकता बताई, जिससे पारिस्थितिक सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास एक साथ हो सके। उन्होंने प्रकृति-आधारित समाधानों और नवीन वित्तपोषण तंत्रों के महत्व पर भी बल दिया।

आईबीसीए और एडीबी के बीच समझौता

कार्यक्रम के दौरान आईबीसीए और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी भूदृश्य संरक्षण, सतत विकास, क्षमता निर्माण और प्रकृति-अनुकूल वित्तपोषण पहलों में सहयोग को मजबूत करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के तहत आईबीसीए बाघ की सात प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैश्विक मंच के रूप में काम कर रहा है।

40 साल की साझेदारी और वैश्विक अनुभव

एडीबी की कंट्री डायरेक्टर मिया ओका ने बताया कि 2026 में भारत और एडीबी की साझेदारी के 40 वर्ष पूरे होंगे। उन्होंने कहा कि भारत के पास पारिस्थितिक संरक्षण का व्यापक अनुभव है, जिसे बाघ प्रजातियों वाले अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है। कार्यशाला में बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, मलेशिया, नेपाल और वियतनाम के विशेषज्ञ और सरकारी प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

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