14 अक्टूबर 2026 |
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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का मामला- सीजेपी के दो नेता 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे गए

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OM Darpan

Oct 14, 2026 01:42 pm 370 views
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का मामला- सीजेपी के दो नेता 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे गए


नई दिल्ली।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने और बैरिकेडिंग पार करने के मामले में अदालत ने यह फैसला सुनाया है। वहीं, पार्टी के एक अन्य कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे को पुलिस ने शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया है।

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बेल बॉन्ड तोड़ने का लगा आरोप

पुलिस के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपने पुराने बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन पर भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 163 के नियमों को दोबारा तोड़ने का आरोप है। पुलिस ने अदालत में उन्हें 'रिपीट ऑफेंडर' बताते हुए उनके पिछले आचरण का हवाला दिया, जिसके बाद कोर्ट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दूसरी तरफ, अजिंक्य शिंदे को 5 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरवाकर रिहा किया गया है और उन्हें अगले छह महीने तक किसी भी तरह की अशांति न फैलाने की हिदायत दी गई है।


संस्थापक ने पूछा- क्या तिरंगा फहराना गुनाह है

इस पुलिसिया कार्रवाई पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि आशुतोष और सौरव की सिर्फ इतनी गलती थी कि वे जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने गए थे। दिपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि वे 'इंडिया' गठबंधन के विरोधी हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों के आंदोलन का मूल उद्देश्य एक ही है।


चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की कर रहे थे मांग

दरअसल, मंगलवार सुबह सीजेपी कार्यकर्ता भारी पुलिस बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हो गए थे। वहां उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। गौरतलब है कि प्रशासन ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। इससे पहले बीते शनिवार को भी अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया था। उस वक्त उन्हें इस शर्त पर छोड़ा गया था कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इसी शर्त को तोड़ने को पुलिस ने ताजा कार्रवाई का मुख्य आधार बनाया है।

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