संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं को पिरोने वाला 'स्वर्णिम धागा': उपराष्ट्रपति
OM Darpan

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में सी.पी. राधाकृष्णन ने बांटे स्वर्ण पदक, नशामुक्ति की दिलाई शपथ
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए और उपस्थित लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि यह संस्थान अब संस्कृत अध्ययन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के दृष्टिकोण को साकार करता है।
संस्कृत है स्वर्णिम धागा
उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय को नैक में ए++ ग्रेड हासिल करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की अनेक भाषाओं के मोतियों को एक माला में पिरोने वाला स्वर्णिम धागा है। उन्होंने विद्यापीठ पंचांग के प्रकाशन की 44 साल की परंपरा और प्राकृत तथा वास्तु शास्त्र जैसे विषयों के शिक्षण की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने शास्त्री के 'जय जवान, जय किसान' के नारे को देश की सुरक्षा और खाद्य निर्भरता का प्रतीक बताया।
पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर
सी.पी. राधाकृष्णन ने छात्रों और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अप्रकाशित संस्कृत पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण करें। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत 500 करोड़ रुपये के कोष से भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को दुनिया के सामने लाया जा रहा है। उन्होंने संस्कृत के विकास और भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और अष्टदशी योजना का भी जिक्र किया।
तकनीक का करें उपयोग, नशे से रहें दूर
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में संस्कृत के संरक्षण के लिए तकनीक का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, अनुशासन अपनाने और सोशल मीडिया का संयम से इस्तेमाल करते हुए कौशल विकास में समय देने को कहा।
तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन
समारोह में आम्नया कल्पतरु, विद्यामित्रम और शोध प्रभा (जुलाई-सितंबर 2026) नामक तीन प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक समेत कई विद्वान, शिक्षक, अभिभावक और छात्र मौजूद रहे।
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