21 अक्टूबर 2026 |
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बंद खदानों को उपयोगी बनाने वाली सीसीओ की सुविकल्प पहल को स्कॉच गोल्ड अवार्ड

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OM Darpan

Oct 21, 2026 11:28 pm 364 views
बंद खदानों को उपयोगी बनाने वाली सीसीओ की सुविकल्प पहल को स्कॉच गोल्ड अवार्ड


नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय के अधीन कार्यरत कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) की खास पहल 'सुविकल्प' को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कामयाबी मिली है। बंद हो चुकी कोयला खदानों के वैज्ञानिक तरीके से पुनरुपयोग और पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने वाले इस टूल को 'स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026' से नवाजा गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान 26 सितंबर 2026 को डिजिटल परिचालन दक्षता और डेटा-संचालित निर्णय लेने की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया गया है।

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डेटा और मानकों के आधार पर होता है मूल्यांकन

सीसीओ द्वारा विकसित 'सुविकल्प' एक ऐसा आंतरिक टूल है, जो पूरी तरह डेटा और तथ्यों पर काम करता है। यह तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मानकों के आधार पर खदान पुनरुपयोग से जुड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन और रैंकिंग करता है। जब किसी उपयुक्त परियोजना की पहचान हो जाती है, तो उसे 'प्रिज्म' ढांचे के जरिए धरातल पर उतारा जाता है। प्रिज्म के माध्यम से डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट), टेंडर दस्तावेज, केस स्टडी और काम करने वाली एजेंसियों की जानकारी मुहैया कराई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य खनन के बाद बची जमीन का समाज और अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी उपयोग करना है।


वेबिनार श्रृंखला से मजबूत हुई समझ

खदानों को बंद करने और उनके सतत इस्तेमाल को लेकर हितधारकों के बीच बेहतर समझ विकसित करने के लिए सीसीओ ने 'सुविकल्प संवाद' नाम से राष्ट्रीय वेबिनार श्रृंखला भी चलाई। इस पहल के तहत कुल 12 विषयगत वेबिनार आयोजित किए गए। इनमें कोयला कंपनियों, सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और शैक्षणिक संस्थानों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान पर्यटन विकास, आजीविका के नए अवसर, सामुदायिक सहभागिता, वित्तीय तंत्र और परित्यक्त खदानों के अभिनव इस्तेमाल जैसे अहम मुद्दों पर मंथन किया गया।


रोजगार और पर्यावरण सुधार पर जोर

इस पूरी कवायद ने खदानों को बंद करने की प्रक्रिया को केवल नियामकीय औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हुए इन संवादों से पर्यावरण बहाली, आजीविका सृजन और सामुदायिक विकास को बड़ा बल मिला है। यह पहल कोयला मंत्रालय के उस दृष्टिकोण को सीधे तौर पर समर्थन दे रही है, जिसके तहत बंद खदानों को दोबारा उत्पादक संपत्तियों में बदलकर क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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