सुप्रीम कोर्ट ने देवघर हवाई अड्डे मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
OM Darpan
Nov 28, 2024 01:09 pm
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28 Nov 2024
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देवघर हवाई अड्डे मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली झारखंड सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने दोनों सांसदों को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को कुछ बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने इन दोनों सांसदों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करते हुए इसे असंगत बताया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
दोनों सांसदों पर आरोप निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने सितंबर 2022 में देवघर हवाई अड्डे पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया था। इसके अलावा, उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को निजी विमान को उड़ान भरने की इजाजत देने के लिए धमकी दी और मजबूर किया।झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में एफआईआर रद्द करते हुए कहा था कि भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आरोप नहीं बनते, क्योंकि यह एक विशेष अधिनियम—विमान अधिनियम, 1934 के अंतर्गत आता है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर कायम रखने योग्य नहीं है क्योंकि विमान अधिनियम की धारा 12बी के तहत केवल नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को शिकायत की जा सकती है।
झारखंड सरकार का तर्क झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में कहा कि आईपीसी के तहत अपराध और विमान अधिनियम के तहत अपराध अलग-अलग हैं। राज्य सरकार का कहना था कि हाईकोर्ट ने विशेष कानून (विमान अधिनियम) के बजाय सामान्य कानून (आईपीसी) का गलत तरीके से हवाला दिया। राज्य ने यह भी तर्क दिया कि जब हवाई अड्डे की सुरक्षा और जीवन को खतरे में डालते हुए नियमों का उल्लंघन किया गया हो, तो विमान अधिनियम आईपीसी पर हावी नहीं हो सकता।सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर सुनवाई करेगा और राज्य सरकार से जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है।
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