आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनी दिल्ली की नई पसंद, पांच हजार करोड़ का बाजार
OM Darpan
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सोने के बढ़ते दामों के बीच कृत्रिम आभूषणों की चमक बढ़ी, डिजाइनों और गुणवत्ता में लगातार सुधार
नई दिल्ली।
चांदनी चौक की व्यस्त दरीबा गली में सजे गहनों के शोरूम में अब सिर्फ सोने की नहीं, आर्टिफिशियल ज्वेलरी की भी दमक दिखाई दे रही है। ग्राहकों की पहली पसंद अब महंगे गहनों के बजाय सुंदर और किफायती कृत्रिम आभूषण बनते जा रहे हैं।
दरीबा की एक दुकान पर ग्राहक आकांक्षा बताती हैं कि उनकी सहेली की शादी नजदीक है और वे सुंदर दिखना चाहती हैं, लेकिन सोने के बढ़ते दामों के कारण उन्होंने आर्टिफिशियल ज्वेलरी को बेहतर विकल्प माना है। यह रुझान अब पूरे दिल्ली-एनसीआर में तेजी से फैल रहा है।
हर साल 100 फीसदी बढ़ रही मांग
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले चार-पांच वर्षों में आर्टिफिशियल ज्वेलरी का कारोबार हर साल 100 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। फिलहाल दिल्ली में यह बाजार पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है। बढ़ती मांग के साथ डिजाइनों की विविधता और गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है।
दरीबा व्यापार मंडल के महासचिव मनीष वर्मा बताते हैं, “कोई भी आसानी से यह नहीं पहचान सकता कि यह गहना असली नहीं है। यह पीतल और तांबे से बना है, जिस पर सोने का पानी चढ़ा हुआ है।” उनके अनुसार, एक ऐसा ज्वेलरी सेट जो सोने में 20 से 25 लाख रुपये का होता है, वही आर्टिफिशियल रूप में 30 से 40 हजार रुपये में मिल जाता है।
नकल से निकली नई फैशन ट्रेंड की चमक
बाजार में पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ मीनाकारी, पोल्की, कुंदन और अमेरिकी हीरे की ज्वेलरी खूब बिक रही है। कुछ दुकानों में नीता अंबानी द्वारा बेटे अनंत अंबानी की शादी में पहने गए ज्वेलरी सेट की प्रतिकृतियाँ भी लोकप्रिय हैं। उच्च गुणवत्ता वाले कृत्रिम आभूषणों में अब थोड़ी मात्रा में चांदी का प्रयोग भी होने लगा है।
400 साल पुराने बाजार में नई रौनक
दरीबा, जो 400 साल पुराना आभूषण बाजार है, अब कृत्रिम गहनों के लिए भी जाना जा रहा है। यहाँ करीब 400 से अधिक शोरूम हैं, जबकि सदर बाजार में 20 से ज्यादा थोक विक्रेता सक्रिय हैं। इन दुकानों में गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से तैयार गहने आते हैं। अब दिल्ली में भी इनका निर्माण शुरू हो गया है।
डेस्टिनेशन वेडिंग ने बढ़ाई मांग
फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि शादियाँ अब घरों से दूर—गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद या पहाड़ी इलाकों में होने लगी हैं। इन स्थानों पर असली गहने ले जाना जोखिम भरा होता है, इसलिए महिलाएँ कृत्रिम आभूषणों को तेजी से अपना रही हैं।
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