कुआकोंडा की रामबती ने मुर्गी पालन से कमाए 25 हजार
OM Darpan
Sep 09, 2026 12:17 am
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09 Sep 2026
दंतेवाड़ा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना दंतेवाड़ा जिले के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की आय का जरिया बन रही है। कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में बीते डेढ़ वर्षों से लागू इस योजना के जरिए लगभग 2,200 परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा जा चुका है।
कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की निवासी रामबती नाग ने इस योजना का लाभ उठाकर मुर्गी पालन का आगाज किया। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून माह में 80 रुपए प्रति चूजा की दर से 100 चूजे और दाना उपलब्ध कराया गया था।
शुरुआती दौर में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मृत्यु हो गई, लेकिन रामबती ने काम जारी रखा। बचे हुए चूजों का बेहतर रखरखाव करके उन्होंने अब तक करीब 25,000 रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर ली है। वे तैयार मुर्गों को 500 रुपए प्रति किलो की दर से बिक्री कर रही हैं, जिनका औसतन वजन 1 से 3 किलोग्राम तक होता है।
15 दिन की ब्रुडिंग से दोहरा लाभ
योजना के अंतर्गत क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के जीरो-डे चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग केंद्र में 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं। इसके बाद इन स्वस्थ चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को सौंपा जाता है। इससे तैयार करने वाली उद्यमी और पालन करने वाली महिला, दोनों को आय का अवसर मिल रहा है।450 महिलाओं को मिला रोजगार
जिले के विभिन्न क्लस्टरों में अब तक लगभग 450 महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा गया है। महिलाओं को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार 50 से 100 चूजे मुहैया कराए जाते हैं। बिहान योजना की इस पहल ने स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है और महिलाओं में आत्मनिर्भरता की राह तैयार की है।जरूरी खबरें
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